नई दिल्ली. पूरी तरह बर्फ से ढकी लद्दाखी सीमा पर चीनी सेना के सामने डटी भारतीय फौज ने गर्मियों के लिए अभी से तैयारी शुरू कर दी है। इसके लिए भारतीय सेना गाइडेड उपकरणो के साथ ही ऐसे बम आयात कर रही है जो हवा से जमीन पर सटीक निशाना लगाते हैं।

एक अन्तरराष्ट्रीय डिफेंस पत्रिका के अनुसार भारत ने लंबी दूरी की एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल की आपूर्ति के लिए इजरायल से 20 करोड़ डॉलर का सौदा किया है। सेना युद्ध के दौरान संचार बरकरार रखने के लिए बीनेट ब्रॉडबैंड आईपी सॉफ्टवेयर वाला रेडियो भी खरीद रही है।

हवा से जमीन पर मार करने वाली इजराइली मिसाइल स्पाइस 2000 को आपात सौदे के तहत अंजाम दिया गया है। 500 किलोग्राम वजनी स्पाइस बालाकोट हमले के दौरान सटीक निशाने के चलते लड़ाकू पायलटों को बेहद पसंद आया था। मिसाइलों को सुखोई-30 और मिराज-2000 में फिट किया जाएगा। भारतीय वायुसेना के राफेल लड़ाकू विमानों फ्रेंच हैमर हथियार प्रणाली लगी हुई है। शस्त्रागार में 10 से 15 किलोमीटर की मारक क्षमता वाले लेजर-गाइडेड बम भी शामिल हैं।

लेह की रक्षा करने वाली सेना की 14वीं कोर ने अन्य उपकरणों के अलावा मिसाइलों के साथ लगभग 40 स्पाइक एटीजीएम लांचर्स की आवश्यकता बताई थी। अभी जितनी भी एटीजीएम हैं वे लद्दाख में महत्वपूर्ण ऊंचाइयों पर तैनात हैं।स्पाइक चौथी पीढ़ी की 4 किलोमीटर तक सटीक निशाना लगाती है। वैसे ये टैंक-रोधी है लेकिन जमीनी किलेबंदी और बंकरों को चुटकी बजाते नष्ट कर देती है।

सरकार ने रूस से 300 शॉर्ट-रेंज एयर-टू-एयर मिसाइल आर-73 और 400 मध्यम-रेंज की एयर-टू एयर गाइडेड मिसाइलें आरवीवी-एई और राडार-बस्टिंग मिसाइल एक्स-31 खरीदने का करार किया है। तीस किलोमीटर रेंज वाली आर 73 मिसाइल अमरिकी एआईएम 120 का रूसी संस्करण मानी जाती है।

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