नई दिल्ली. भारत की महिलाएं सोमवार को घर-घर में गोबर से बनी मूर्ति के सीने पर ईंट रखकर मूसलों से तोड़ेंगी। महिलाओं का मानना है कि ऐसा करने से उनके भाइयों के समक्ष आने वाले कष्ट दूर हो जाएंगे।
जी हां, दीवाली के तीसरे दिन भाई दूज पर ग्रामीण भारत ऐसी ही प्रथाओं को निभाएगा, लेकिन शहरों में ऐसी प्रथाएं अब नहीं रही हैं।
भाई दूज अन्य सभी त्योहारों से बहुत अलग माना जाता है। इस त्योहार में किसी देवी-देवता की उपासना आदि क्रियाओं की बजाय भाई को तिलक करने का विधान है। कहते हैं कि कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा के दिन जो बहन अपने भाई के माथे पर भगवान को प्रणाम करते हुए कुमकुम का तिलक करती है, उनके भाई को सभी सुखों की प्राप्ति होती है।

तिलक के साथ भोजन

भाईदूज कार्तिक मास द्वितीया को मनाया जाता है। इस दिन विवाहित महिलाएं भाइयों को घर पर आमंत्रित कर उन्‍हें तिलक लगाकर भोजन कराती हैं। एक ही घर में रहने वाले भाई-बहन साथ बैठकर खाना खाते हैं। भाईदूज को यम द्वितीया भी कहा जाता है। इस दिन मृत्‍यु के देवता यम की पूजा का भी विधान है। इस दिन को भ्रातृ द्वितीया भी कहा जाता है। भाईदूज के दिन बहनें रोली एवं अक्षत से अपने भाई का तिलक कर उसके उज्ज्वल भविष्य के लिए आशीष देती हैं। भाई अपनी बहन को उपहार देता है।

बिहार में बहनों से डांट खाएंगे भाई

भाई दूज का त्योहार देश भर में धूम-धाम से मनाया जाता है। हालांकि इस पर्व को मनाने की विधि हर जगह एक जैसी नहीं है। उत्तर भारत में चलन है कि बहनें भाई को अक्षत और तिलक लगाकर नारियल देती हैं। पूर्वी भारत में बहन शंखनाद के बाद भाई को तिलक लगाती हैं और भेंट स्वरूप कुछ उपहार देती हैं। मान्यता है कि इस दिन बहन के घर भोजन करने से भाई की उम्र बढ़ती है। बिहार में भाईदूज पर बहनें भाइयों को डांटती हैं और उन्हें भला बुरा कहती हैं और फिर उनसे माफी मांगती हैं। दरअसल यह परंपरा भाइयों द्वारा पहले की गई गलतियों के चलते निभाई जाती है। इस रस्म के बाद बहनें भाइयों को तिलक लगाकर उन्हें मिठाई खिलाती हैं।

धर्मग्रंथों के अनुसार, कार्तिक शुक्ल द्वितीया के दिन ही यमुना ने अपने भाई यम को अपने घर बुलाकर सत्कार करके भोजन कराया था। इसीलिए इस त्योहार को यम द्वितीया के नाम से भी जाना जाता है। यमराज ने प्रसन्न होकर यमुना को वर दिया था कि जो व्यक्ति इस दिन यमुना में स्नान करके यम का पूजन करेगा, मृत्यु के बाद उसे यमलोक में नहीं जाना पड़ेगा।

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