नई दिल्ली. कर्नाटक, महाराष्ट्र, तमिलनाडु, तेलंगाना और केरल उन शीर्ष पांच राज्यों में शामिल हैं जिन्होंने नवाचार अपनाने में कोई कोताही नहीं बरती। नीति आयोग की ओर से बुधवार को जारी दूसरे नवाचार सूचकांक में बिहार, छत्तीसगढ़ और झारखंड सबसे नीचे के पायदान पर खड़े हैं।

आयोग के उपाध्यक्ष राजीव कुमार और सीईओ अमिताभ कांत की ओर से जारी सूचकांक को ग्लोबल इनोवेशन इंडेक्स की तर्ज पर विकसित किया गया है। नीति आयोग भारत नवाचार सूचकांक 2020 नवाचार को बढ़ावा देने के प्रयासों तथा उनके सापेक्ष प्रदर्शन के आधार पर राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को स्थान देता है। सूचकांक का मकसद नवाचार में राज्यों की ताकत और कमजोरियों का पता लगाकर उन्हें इस दिशा में मजबूती लाने के लिए प्रेरित करना है।

इसलिए अव्वल रहा कर्नाटक

सूचकांक में राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को तुलना के लिहाज से 17 प्रमुख राज्यों, 10 पूर्वोत्तर और पहाड़ी राज्यों तथा नौ शहरी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में विभाजित किया गया है। बड़े राज्यों में औसत नवाचार अंक 25.35 हैं, जबकि 42.5 अंक के साथ कर्नाटक शीर्ष पर है। कर्नाटक को वेंचर कैपिटल सौदों, पंजीकृत जीआई (भौगोलिक संकेतक) और आईसीटी (सूचना तथा संचार प्रौद्योगिकी) निर्यात के चलते यह दर्जा मिला।

सूचकांक में 38 अंक के साथ महाराष्ट्र दूसरे स्थान पर है, जबकि 14.5 अंक के साथ बिहार सबसे नीचे रहा। दक्षिण के चार राज्य बड़े राज्यों की श्रेणी में शीर्ष पांच में शामिल हैं। भारत में नवाचार को बढ़ावा देने के लिए प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार का कार्यालय और नीति आयोग मिलकर काम कर रहे हैं। भारतीय प्रतिभाओं को निखारने के लिए कुछ योजनाएं पहले से चल रही हैं, सरकार उन्हें और बेहतर बनाना चाहती है।

Leave a comment

Your email address will not be published.