जयपुर. प्रदेश के टोंक और करौली जिले के गरीब बीड़ी मजदूर जल्द ही दाने-दाने को तरस सकते हैं क्योंकि केन्द्र सरकार सिगरेट एंड अंडर टोबेको प्रोडक्ट एक्ट (कोटपा) 2003 के संशोधनों फरवरी 2021 से लागू करने वाली है। इन संशोधनों से बीड़ी विक्रय पर भी वे नियम लागू हो जाएंगे जो सिगरेट उद्योग पर लागू हैं। इसके चलते बीड़ी निर्माण में लगे मजदूरों का रोजगार खत्म हो सकता है।

संशोधन के तहत बीड़ी निर्माताओं को बीड़ी बंडल का 90 प्रतिशत हिस्सा चेतावनी के लिए सुरक्षित रखना होगा। इसी हिस्से में उसे बीड़ी निर्माण की तिथि के साथ ही निर्माता का ब्यौरा भी होगा। इसके अलावा निर्माता अपना लेबल भी नहीं लगा सकेगा।

टोंक और करौली में बनने वाली बीड़ी पूरे देश में जाती है। दोनों जिलों में बीड़ी निर्माण से बड़े पैमाने पर रोजगार पैदा होते हैं। इसके कारोबार से भी बड़ी संख्या में लोग जुड़े हुए हैं। आदिवासी बीड़ी बनाने के काम आने वाले तेंदूपत्ता का संग्रह करके जीवन यापन करते है। इस उद्योग को पानी और बिजली की जरूरत नहीं होती है लेकिन इसके बावजूद उसे सिगरेट उद्योगों के समानांतर मानते हुए नए नियम थोपे जा रहे हैं।

नए नियमों के मुताबिक बीड़ी बेचने वाले पनवाड़ी तक को पंजीयन कराना अनिवार्य होगा। इसका दुष्प्रभाव कारोबार पर पड़ेगा। आंकड़ों के अनुसार देशभर में 15 करोड़ लोग बीड़ी निर्माण और विक्रय से जुड़े हुए हैं। माना जा रहा है कि नए संशोधन लागू होने के बाद बीड़ी निर्माण और विक्रय पर नकारात्मक असर आएगा जिसका परिणाम सिर्फ गरीब बीड़ी मजदूरों को भोगना होगा क्योंकि बीड़ी निर्माता आर्थिक रूप से समृद्ध हैं।

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