खानवा की लड़ाई में पहली बार पराजित हुए थे सांगा

नई दिल्ली. क्या आप जानते हैं कि मुगलों के पैर जमाने से पहले भारत का सबसे बड़ा जंगजू कौन था? मुगलिया सल्तनत की नींव रखने वाले बाबर ने अपनी आत्मकथा बाबरनामा में उल्लेख किया है कि राणा सांगा भारत के सबसे बड़े जंगजू हैं।

बाबरनामा के अनुसार पानीपत की लड़ाई जीतने के बावजूद आधी सेना गंवा चुके बाबर का जब खानवा के मैदान में भारत के सबसे बड़े योद्धा राणा सांगा से सामने हुआ तो उसकी सेना ने धैर्य खो दिया और बाबर को हार सामने दिखने लगी।

खानवा के युद्ध से पहले राणा सांगा कई दर्जन युद्ध लड़ चुके थे और हरेक जंग में विजयश्री ने उन्हीं का वरण किया था। लगातार विजय से उनकी सेना का मनोबल सातवें आसमान पर था और वे पूरी तरह आश्वस्त थे कि बाबर से युद्ध में विजय उनकी ही होगी।

बाबर पर शोध करने वालों के अनुसार हार को सामने देख बाबर ने एक ऐसी रणनीति का इस्तेमाल किया जिसने उसकी पराजय को विजय में ​बदल दिया। उसने अपनी सेना को एकत्र करके ऐलान किया कि वह कभी शराब का सेवन नहीं करेगा। इससे पहले उसने अल्लाह का हवाला देकर सैनिकों में जोश भर दिया था।

बाबर ने लिखा है कि मैंने काबुल से शराब मंगाई थी और बाबा दोस्त सूजी ऊंटों की तीन पंक्तियों पर शराब के मटके भर कर ले आया। इसी दौरान मोहम्मद शरीफ़ नजूमी ने यह बात फैला दी कि मंगल के पश्चिम में होने से जंग में मुगलिया सेनाओं की हार होगी।

इस बात ने मेरी सेना का दिल हिला दिया। दुश्मनों की बड़ी संख्या के कारण सेना में बद दिली फ़ैल गई थी। मैंने पूरी सेना को एक जगह इकट्ठा किया और कहा कि जो कोई भी इस दुनिया में आया है उसे मरना है। जीवन ख़ुदा के हाथ में है, इसलिए मृत्यु से नहीं डरना चाहिए। तुम अल्लाह के नाम पर क़सम खाओ कि मौत को सामने देख कर मुंह नहीं मोड़ोगे और जब तक जान बाक़ी है तब तक लड़ाई जारी रखोगे। भाषण से सेना में उत्साह भर गया। जमकर हुई लड़ाई में आखिरकार जीत हुई।

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