नई दिल्ली. पूर्वी लद्दाख में चीनी पीपुल्स लिबरेशन आर्मी के सामने खड़ी भारतीय सेना के जवानो से मिलने पहुंचे आर्मी चीफ मनोज नरवणे ने बुधवार को वास्तविक नियंत्रण रेखा पर तैनात सेना के टैंकों का जायजा लिया। इस दौरान उन्होंने जवानों से मुलाकात भी की।

आर्मी चीफ ने 14 हजार फीट की ऊंचाई पर रेचिन ला में हालात की जानकारी ली। पूर्वी लद्दाख की सुरक्षा की जिम्मेदारी सम्भाल रही सेना की फायर एंड फ्यूरी कॉर्प्स के जवान अग्रिम मोर्चे पर 14 हजार फीट की ऊंचाई पर तैनात है। आर्मी चीफ ने अग्रिम बेस तारा का दौरा भी किया। यहां पर चीन और भारत के 50-50 हजार जवान तैनात हैं। मई में चीन और भारत के जवानों के बीच हुई झड़प के बाद से वास्तविक नियंत्रण रेखा पर तनाव बरकरार है।

भारतीय सेना की फायर एंड फ्यूरी कोर ऊंचे पहाड़ों पर बर्फीले तूफानों में भी दुश्मन सेना का मुकाबला करने के लिए प्रशिक्षित है। ये जम्मू-कश्मीर के उधमपुर में तैनात रहने वाली टुकड़ी है। सेना में 14वीं कोर के नाम से जानी जाने वाली इस सैनिक टुकड़ी का गठन 1962 में चीन से युद्ध के बीच तैयार किया गया था। कोर करगिल-लेह में पूरे साल तैनात रहता है।

भारतीय सेना की ये टुकड़ी सियाचिन में तैनात सैनिकों के लिए रसद और बाकी जरूरी चीजों की सप्लाई करती है। इस कोर की तीसरी इंफेंट्री डिवीजन ने 1965 की लड़ाई में पाकिस्तान के छक्के छुड़ा दिए थे। इसका हेडक्वार्टर लेह से लगभग 40 किलोमीटर दूर कारू में है।

इसकी आठवीं इंफ्रेंट्री डिवीजन को 1963 में नगालैंड में काउंटर इनसर्जेंसी के लिए तैयार किया गया था। 1990 तक ये कोहिमा में तीसरी कोर के तहत काम करती रही है। चौदहवीं कोर की सबसे बड़ी खासियत इसका हाई अल्टिट्यूड मेडिकल रिसर्च सेंटर है। ये अकेला ऐसा मल्टी-स्पेशियलिटी अस्पताल है, जो इतनी ऊंचाई पर स्थित है और बर्फीले मौसम में भी सर्जरी करता है।

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