पर्याप्त फंड आवंटन के अभाव में हुई है ये हालत

नई दिल्ली. नौ दिसम्बर को पूरे नौ साल बीत गए लेकिन भ्रष्टाचार से लड़ने के लिए बनाया गया लोकपाल कानून अभी तक मरणासन्न स्थिति में अंतिम सांसे गिन रहा है क्योंकि इसे जीवन देने के लिए पर्याप्त फंड का आवंटन नहीं हो पाया है।

अन्ना हजारे की अगुवाई में 2011 में चले लोकपाल आंदोलन के बाद 2013 में लोकपाल कानून बनाया गया लेकिन केंद्र समेत कई राज्यों में समय पर नियुक्ति न होने और फंड की कमी उसे आईसीयू से बाहर नहीं आने दे रही है। सर्वोच्च न्यायालय के 2018, 2019 और 2020 में दिए गये निर्देश के बावजूद 8 राज्यों में लोकायुक्त नियुक्त नहीं हैं और केंद्रीय लोकपाल में भी दो पद खाली हैं। नौ राज्यों को लोकायुक्त कानून बनाने के राजनीतिक वादे की याद तक नहीं है।

ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशल इंडिया की ओर से नौ दिसम्बर को अंतरराष्ट्रीय भ्रष्टाचार निरोध दिवस के मौके पर एक रिपोर्ट जारी की। रिपोर्ट के अनुसार सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे की अगुवाई में देश भर में चले लोकपाल आंदोलन के बाद 2013 लोकपाल कानून बनाकर 16 जनवरी 2014 से लागू कर दिया गया।

कानून बनने के एक साल में राज्यों में लोकायुक्त बनाना था, लेकिन सात साल बाद भी कई राज्यों में लोकायुक्त की नियुक्ति नहीं हुई है। जबकि लोकपाल और लोकायुक्त अधिनियम, 2013 की धारा 63 में कहा गया है कि संसद में इस कानून के पारित किए जाने के एक साल के भीतर सभी राज्य लोकायुक्त की नियुक्ति करेंगे, लेकिन आठ राज्यों में लोकायुक्त के पद खाली हैं। नौ राज्यों ने लोकायुक्त कानून में बदलाव नहीं किया है।

रिपोर्ट के अनुसार 2018, 2019 और 2020 में सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों से कहा था कि वे कानून के मुताबिक समयसीमा के अंदर लोकायुक्त की नियुक्ति करें लेकिन नतीजा ढाक के तीन पात है। जिन राज्यों में लोकायुक्त कानून बना है, उनमें से हिमाचल प्रदेश, पंजाब, गोवा, महाराष्ट्र, राजस्थान, उत्तराखंड, असम और पुदुचेरी में लोकायुक्त पद खाली हैं.

रिपोर्ट के अनुसार, लोकायुक्त कानून के तहत देश के 3.76 लाख से अधिक लोगों ने लोकायुक्त/लोकपाल में शिकायत की। शिकायतों के मामले में मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, कर्नाटक, बिहार एवं राजस्थान अव्वल हैं। कुल शिकायत में से सबसे ज्यादा 1,58,942 मामले मध्य प्रदेश के और 50,500 शिकायतों के साथ महाराष्ट्र दूसरे स्थान पर है। शिकायत भेजने के लिए गुजरात और उत्तर प्रदेश 2,000 जमा कराने होते हैं। केंद्रीय लोकपाल को शिकायत करने के लिए 1,000 रुपये देने होते हैं।

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