नई दिल्ली. एक तरफ तीन नए कृषि कानूनों को वापस लेने की मांग के लिए दिल्ली की सीमा पर किसान आंदोलन जारी है तो दूसरी ओर उद्योग विशेषज्ञों ने कहा है कि सरकार को कृषि क्षेत्र के समग्र विकास के लिए आगामी बजट में स्वदेशी कृषि अनुसंधान, तिलहन उत्पादन, खाद्य प्रसंस्करण और जैविक खेती के लिए अतिरिक्त धनराशि और प्रोत्साहन देना चाहिए।

विशेषज्ञों ने कहा कि प्रत्यक्ष नकद हस्तांतरण (डीबीटी) योजना का इस्तेमाल किसानों को सब्सिडी देने की जगह अधिक समर्थन देने के लिए होना चाहिए। खाद्य प्रसंस्करण उद्योग ने किसान के लिए बेहतर कीमत पाने और बिचौलियों को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। बजट में खाद्य प्रसंस्करण के लिए ब्याज प्रोत्साहन, करों में कटौती, प्रौद्योगिकी का उपयोग और विशेष प्रोत्साहन देना चाहिए।

पीएम-किसान योजना का भुगतान किसानों के बैंक खातों में करने के लिए डीबीटी तंत्र ठीक से तैयार करना चाहिए और सब्सिडी देने के बदले किसानों को अधिक समर्थन देने के लिए इसका इस्तेमाल किया जाना चाहिए।

लेकिन ये किसानों को तय करना चाहिए कि वे इस धन का सही इस्तेमाल कैसे करना चाहते हैं। डीबीटी से किसान बीज खरीद सकते हैं, नई प्रौद्योगिकी का इस्तेमाल कर सकते हैं, पानी का बेहतर उपयोग कर सकते हैं। कई भारतीय स्टार्टअप ने कृषि प्रौद्योगिकी क्षेत्र में निवेश किया है और इन कंपनियों की वृद्धि के अनुकूल नीतियां तैयार करनी चाहिए।

खाद्य तेलों के आयात को कम करने के लिए तिलहन के घरेलू उत्पादन को बढ़ाना जरूरी है और इसके लिए अधिक धन आवंटित किया जाना चाहिए। सरकार को किसानों को जैविक खेती अपनाने के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए। इस क्षेत्र में शीतगृहों के निर्माण और भंडारण क्षमताओं को बढ़ाने के लिए निवेश की जरूरत है।

वित्त मंत्रालय के साथ बजट पहले परामर्श में भारत कृषक समाज ने सरकार से यूरिया की कीमत बढ़ाने और फॉस्फेटिक तथा पोटेशिक जैसे पोषक तत्वों की कीमत कम करने के लिए कहा था ताकि खाद के संतुलित उपयोग को बढ़ावा दिया जा सके।

Leave a comment

Your email address will not be published.