नई दिल्ली. जड़ी-बूटियों की खान हिमालय की गोद में पैदा होने वाले ‘विषनाग’ सफेद दागों के लिए मौत का काढ़ा सिद्ध हुआ है। अब तक डेढ़ लाख से अधिक लोग ‘विषनाग’ से बनी दवा का इस्तेमाल करके सफेद दागों से छुटकारा पा चुके हैं। ‘विषनाग’ से तैयार दवा ल्यूकोस्किन सफेद दाग की समस्या का प्रभावी निदान करती है।

विश्व में एक से दो फीसदी लोग सफेद दाग की समस्या से प्रभावित हैं लेकिन भारत में ऐसे लोगों की संख्या करीब पांच करोड़ होने का अनुमान है। यह कुल जनसंख्या का तीन से चार फीसदी है। यह आटो इम्यून डिसआर्डर है जिसमें त्वचा के रंग के लिए जिम्मेदार कुछ सूक्ष्म कोशिकाएं निष्क्रिय हो जाती हैं और त्वचा पर सफेद दाग उभरने लगते हैं। हालांकि इसका शरीर की क्षमता पर किसी प्रकार का प्रभाव नहीं पड़ता है।

ल्यूकोस्किन को हिमालयी क्षेत्र में दस हजार फुट की ऊंचाई पर पाए जाने वाले औषधीय पौधे विषनाग से तैयार किया गया है। यह खाने और लगाने वाली, दोनों स्वरूपों में उपलब्ध है। अब तक डेढ़ लाख से अधिक लोगों का इससे उपचार किया जा चुका है।

सफेद दाग की दवा ल्यूकोस्किन की खोज रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) के वैज्ञानिक डॉ. हेमन्त कुमार पांडेय ने की है। पांडेय डीआरडीओ की पिथौरागढ़ (उत्तराखंड) स्थित प्रयोगशाला-रक्षा जैव ऊर्जा अनुसंधान संस्थान (डीआईबीईआर) में वरिष्ठ वैज्ञानिक हैं। वह छह दवाओं एवं हर्बल उत्पादों की खोज कर चुके हैं लेकिन उनकी सबसे बड़ी खोज सफेद दाग यानी ल्यूकोडर्मा की दवा ल्यूकोस्किन की खोज करना है। पांडेय ने इसके अलावा खुजली, दांत दर्द, रेडिएशन से बचाने वाली क्रीम, हर्बल हेल्थ उत्पाद भी तैयार किए हैं।

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