नई दिल्ली. गठबंधन समझौते में मिली सत्तर सीटों में से अधिकांश को खो बैठी बिहार कांग्रेस के प्रभारी बदलने से पार्टी की राज्य इकाई में भूचाल आ गया है। पार्टी ने गुजरात के नेता शक्तिसिंह गोहिल को हटाकर भक्त चरण दास को बिहार कांग्रेस का नया प्रभारी बनाया है। इस बदलाव के साथ ही बिहार कांग्रेस में टूटन की आशंकाएं बढ़ गई हैं।

पार्टी के एक नेता और पूर्व विधायक भरत सिंह ने दावा किया है कि कांग्रेस के आधे से अधिक विधायक पार्टी छोड़ सकते हैं। पार्टी में जल्द ही बड़ी टूट होगी और 11 विधायक पार्टी छोड़ देंगे। कांग्रेस हाईकमान ने भरत सिंह के बयान को खारिज कर दिया है।

कांग्रेस नेता भरत सिंह के अनुसार 19 विधायकों में से 11 विधायक ऐसे हैं जो कांग्रेस पार्टी से नहीं है, मगर चुनाव जीत गए, उन्होंने पैसा देकर टिकट खरीदे और विधायक बन गए। चूंकि एनडीए संख्या बल से अपने आप को मजबूत करने के लिए प्रयासरत है, इसलिए वह कांग्रेस विधायकों पर डोरे डाल रहा है। उनका आरोप है कि कांग्रेस विधायक दल के नेता अजीत शर्मा स्वयं पार्टी तोड़ना चाहते हैं।
जो 11 कांग्रेस विधायक पार्टी छोड़ना चाहते हैं, वे कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष मदन मोहन झा, राज्यसभा सांसद अखिलेश प्रसाद सिंह और वरिष्ठ कांग्रेसी नेता सदानंद सिंह के समर्थक हैं। पार्टी में इस टूट के लिए वह सदानन्द सिंह और मदनमोहन झा की एमएलसी बनने की महत्वाकांक्षा को कारण बता रहे हैं। उल्लेखनीय है कि अभी राज्यपाल कोटे से अभी एमएलसी का नॉमिनेशन होना है।

भरत सिंह का कहना है कि वे शुरू से ही कांग्रेस और आरजेडी के साथ गठबंधन खिलाफ रहे हैं। आरजेडी के साथ गठबंधन का विरोध किया है। उन्होंने कांग्रेस के राज्यसभा सांसद अखिलेश प्रसाद सिंह, कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष मदन मोहन झा और वरिष्ठ कांग्रेस नेता सदानंद सिंह पर पार्टी विरोधी गतिविधियों में लिप्त होने का आरोप लगाया।

इससे पहले बिहार कांग्रेस के प्रभारी शक्ति सिंह गोहिल ने कांग्रेस हाईकमान से गुजारिश की थी कि उन्हें बिहार के प्रभार से मुक्त किया जाए। इसके बाद कांग्रेस हाईकमान ने शक्ति सिंह गोहिल को बिहार के प्रभार से मुक्त कर दिया।

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