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हताशा के कुएं में जश्न की तैयारी थी लेकिन किस्मत उनकी……

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खबर और व्यंग्य का मिक्सचर

सुभाष राज

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पिछले छह साल से हताशा के कुएं में डूब-उतरा रहे भगवा पार्टी के सबसे वरिष्ठ सदस्य टीवी देखते-देखते अचानक कांपते पैरों के साथ सोफे से उठ खड़े हुए। सहायक ने देखा तो वह दौड़कर सहारा देने आया। वह सहारा देता, उससे पहले ही उनकी आंखों ने उसे डपट दिया और भरसक ऊँची आवाज में आदेश दिया कि वह जाकर उनकी वो अचकन ले आए जिसे उन्होंने रायसीना रोड वाले किले में जाने के लिए सिलवाया था। अचकचाया सहायक उनके आदेश की पालना करता, उससे पहले ही वे कांपते लेकिन सधे हुए कदमों से उस तिपाई तक आए जिस पर रखा टेलीफोन बजना ही भूल गया था।

क्या ये सच है !

वरिष्ठ सदस्य ने एक जमाने में प्रतिद्धंद्धी रहे और अब गम खाने में मदद करने वाले मंडल के दूसरे वरिष्ठ साथी का नम्बर लगाया। थोड़ी देर इंतजार किया और उनके लाइन पर आते ही खुशी से बौराते हुए बोले, अरे भगवान कृष्ण के मुंह से लगकर मधुर धुन छेड़ने वाले, टीवी पर क्या खबर आ रही है! उधर से जवाब मिलने के बाद बोले, क्या ये सच है! थोड़ी देर हूं-हां करने के बाद उसी तरह तनकर खड़े हो गए जिस तरह अपने स्वर्गवासी दोस्त के जमाने में खड़े होते थे और ये कहते हुए रिसीवर रख दिया… तो फिर यहीं आ जाओ, ये जश्न का मौका है, मिलकर सेलिब्रेट करते हैं।

कांपते पैरों में आई स्थिरता !

इस बीच उन्हें सहारा देते-देते बोर हो चुके सहायक ने बाहर जाकर अपने मोबाइल को कान से लगाया और बोला; साहब जी, टीवी पर 88 साल के ई-श्रीधरन को मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार बनाने की खबर देखकर 93 साल के आडवाणी जी के पैरों ने कांपना छोड़ दिया है और वे मुरली मनोहर जोशी, शांता कुमार जी सहित पुराने संगियों को सेलिब्रेशन के लिए बुला रहे हैं। मुझे समझ नहीं आ रहा कि आखिर हुआ क्या है?

विस्तार से समझाया असर का गणित

सहायक कम खबरी से ये जानकारी मिलते ही भगवा पार्टी के सितारा सुविधाओं से लैस मुख्यालय में हडकंप मच गया। सात सितारा होटलों को भी शरमाने के लिए बाध्य करने वाले मुख्यालय में बैठे बर्फीले प्रदेश के रहने वाले नेताजी ने आनन-फानन में सबको अंगुलियों पर नचाने वाले सूत्रधार जी को फोन किया और सहायक से मिली जानकारी को ज्यों का त्यों उनके कान में उंडेल दिया। बस फिर क्या था, सूत्रधार जी ने पहले तो 7 आरसीआर (अब लोककल्याण मार्ग) में किलेबंदी के बीच बैठे बॉस को इससे पड़ने वाले असर का गणित समझाया और तत्काल उस नेता को हड़काया जिसने ई-श्रीधरन को ख्याली टोपी का उम्मीदवार बताया था।

टीवी चैनलों ने तकनीकी गलती बताकर पीछा छुड़ाया

सूत्रधारजी की गुर्राती हुई आवाज सुनकर दिन-रात मछलियों का भक्षण करने वाले प्रदेश के नेताजी के देवता कूच कर गए। उन्होंने आव देखा ना ताव, सीधे चार लाइन का ऐलान कर दिया कि ई-श्रीधरन ख्याली टोपी के उम्मीदवार नहीं है। इस ऐलान से ई-श्रीधरन को भगवा पार्टी का मास्टर स्ट्रोक बताकर दर्शकों को पका रहे टीवी चैनलों को भी सांप सूंघ गया और उन्होंने बड़ी मुश्किल से मास्टर स्ट्रोक के भावों को चेहरे से हटाकर मासूमियत के साथ दर्शकों को ये बताना शुरू कर दिया कि वे पहले जिसे मास्टर स्ट्रोक बता रहे थे, उसमें एक तकनीकी गलती थी और असली खबर ये है।

उधर सेलिब्रेशन के लिए एकत्र हुए मार्गदर्शक मंडल के वरिष्ठ सदस्यों की परवान चढती आकांक्षाओं पर भी घड़ों पानी ​पड़ गया। उम्र को चकमा देकर फिर से सत्ता के मुख्य गलियारे में घुसने के सपने संजो रहे मंडल ने सबसे वरिष्ठ सदस्य को राजनीतिक शब्दावली वाले “निंदा” जैसे शब्दों से नवाजा और वापस हताशा के कुएं में कूद गए।

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View Comments (1)

  • करारा व्यंग्य है। व्यंग्य के साथ बढ़िया कटाक्ष भी किया आपने।