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बेबाक बात: डा. पानगडिया का निजी अस्पताल में भर्ती होना है गहलोत सरकार के कोरोना कुप्रबंधन का प्रमाण !

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सुभाष राज

कोरोना की दूसरी लहर ने केन्द्र की मोदी सरकार के साथ ही राजस्थान की अशोक गहलोत सरकार के चिकित्सा कुप्रबंधन का पर्दाफाश कर दिया है। दोनों सरकारों के कुप्रबंधन का जायजा सिर्फ दो पद्मश्री के इलाज से लिया जा सकता है। कोरोना इनमें से एक पद्मश्री डा. केके अग्रवाल की
दिल्ली में बलि ले चुका है और दूसरे पद्मश्री तथा दुनिया के टॉप दस न्यूरोलॉजिस्ट की सूची में शामिल डा. अशोक पानगडिया जयपुर के एक निजी अस्पताल में मौत से जूझ रहे हैं। उनकी चिकित्सा में जुटे चिकित्सकों का कहना है कि डा. पानगडिया के सभी अंग बेहतर काम कर रहे हैं लेकिन उनके फेफडों में गम्भीर संक्रमण को कम करने की कोशिश की जा रही है।

आरयूएचएस के वाइस चांसलर रह चुके हैं पानगडिया

पिछले चालीस साल में हजारों मरीजों को जीवनदान दे चुके डा. अशोक पानगडिया के कोविड की चपेट में आने और उसके बाद गम्भीर हालत में एक निजी अस्पताल में जाने की नौबत आने पर एसएमएस मेडिकल कॉलेज के एक प्रोफेसर चिकित्सक ने इन शब्दों में सरकार को लानत भेजी कि डा. पानगडिया उस आरयूएचएस (राजस्थान हैल्थ यूनिवर्सिटी) के वाइस चांसलर रह चुके हैं जिसमें वे सबसे पहले भर्ती हुए लेकिन वहां के कुप्रबंधन के चलते उन्हें निजी अस्पताल ईएचसीसी में जाने को मजबूर होना पड़ा। अर्थात आरयूएचएस कोरोना मरीजों के लिए यमराज का द्वार बन गया है और चिकित्सा मंत्री से लेकर मुख्यमंत्री के चेहरे पर शिकन तक नहीं है जबकि डा. अशोक पानगडिया मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के चिकित्सा सलाहकार भी रह चुके हैं।

आरयूएचएस में बिस्तर बिक्री गिरोह का आतंक

सूत्रों के अनुसार आरयूएचएस में बिस्तर बिक्री गिरोह का आतंक है और इसी के चलते वहां वीआईपी टाइप के मरीजों तक का ख्याल रखने में कोताही बरती जा रही है तथा इसी कारण डा. अशोक पानगडिया को एक निजी अस्पताल की शरण में जाना पड़ा। सूत्रों का दावा है कि एसएमएस मेडिकल कॉलेज के प्रिंसीपल रहे डा. अशोक पानगडिया ने बिस्तर बिक्री गिरोह के सरगनाओं के खिलाफ अपने कार्यकाल में कई तरह की जांच कराई थीं। शायद इसी वजह से ​​उनकी चिकित्सा में लापरवाही बरती गई और वे पोस्ट कोविड संक्रमण के शिकार हो गए।

जारी है बेदर्दी से वसूली

सूत्रों का कहना है कि जब मुख्यमंत्री के चिकित्सा सलाहकार के साथ बिस्तर बिक्री गिरोह इस तरह का बर्ताव कर सकता है तो सिर्फ अंदाजा ​लगाया जा सकता है कि उसने आरयूएचएस में किस बेदर्दी से वसूली की होगी और पैसा नहीं देने वालों को मरने के लिए छोड़ दिया होगा! यहां यह बता देना समीचीन होगा कि कोविड की दूसरी लहर में एसएमएस मेडिकल कॉलेज और आरयूएचएस में आईसीयू, वेंटिलेटर समेत अन्य सुविधाओं का अलॉटमेंट सिर्फ और सिर्फ एसएमएस मेडिकल कॉलेज प्रिंसीपल और आरयूएचएस अधीक्षक के हाथ में है। उनकी इजाजत के बिना किसी को आईसीयू बिस्तर तो दूर रेमेडिशिविर इंजेक्शन तक नहीं लगाया गया।

आफलाइन टीकाकरण सूची है गिरोह की कारगुजारी का प्रमाण

सूत्रों का दावा है कि बिस्तर बिक्री गिरोह की कारगुजारियों का एक और प्रमाण जयपुर के संक्रामक रोग चिकित्सालय में चल रहे आफलाइन टीककरण कार्यक्रम की सूची में छुपा हुआ है। इस सूची में आम जनता नहीं बल्कि राज्य के आईएएस, आईपीएस समेत उन प्रभावशालियों के नाम शामिल हैं जिनकी पहुंच एसएमएस मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य तक है। सरकार इस सूची की जांच कराकर ये प्रमाण जुटा सकती है।

रंगे हाथ पकड़े जाने के बावजूद गिरोह बेखौफ

राजस्थान में कोरोना से निपटने के मामले में सरकार के कुप्रबंधन की बानगी ये है कि उसने उस प्रोफेसर को बेहिसाब अधिकार दे दिए हैं जिनके खिलाफ अपने कॅरियर की शुरूआत में बलात्कार का मामला दर्ज हुआ था और उसके बाद भ्रष्टाचार के अनेक आरोप भी लगे हैं। ताजा आरोप आरयूएचएस अस्पताल में एक से डेढ़ लाख रुपए लेकर आईसीयू के बिस्तर बेचने का है जिसकी बिक्री करने वालों को भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो ने न सिर्फ रंगे हाथ पकड़ा है बल्कि ये खुलासा तक किया है कि पकड़े गए दलाल ने उन डॉक्टरों के नाम बता दिए हैं जो बिस्तर बिक्री गिरोह चला रहे हैं। इसके बावजूद चिकित्सा मंत्री और मुख्यमंत्री के स्तर पर चींटी के रेंगने जितनी हरकत नहीं दिखी और गिरोह बदस्तूर बिस्तर बिक्री कर रहा है।

आरोप दर आरोप फिर भी कोई एक्शन नहीं

इसी आरयूएचएस अस्पताल से रेमे​डिशिविर इंजेक्शन गायब हुए, आक्सीजन सिलेंडरों की कालाबाजारी तक के आरोप लगे। आक्सीजन सप्लाई में गड़बड़ी से कई मरीजों की जान चली गई लेकिन सरकार आरयूएचएस की ओर देखने को तैयार तक नहीं हुई। नतीजा, लीपापोती करके गिरोह ने यह कह दिया कि आक्सीजन सप्लाई में बाधा से किसी की जान नहीं गई! बिस्तर बिक्री नहीं हुई! रेमेडिशिविर गायब होने के आरोप झूठे हैं! कभी छोटी से छोटी खबर पर तत्काल एक्शन लेने वाले मुख्यमंत्री के कार्यालय ने इस मामले में चिकित्सा मंत्री और आरयूएचएस का जिम्मा सम्भाल रहे एसएमएस मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डा. सुधीर भंडारी के यहां से भेजी गई रिपोर्ट को ही स्वीकार कर लिया। यहां तक कि उसने भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो से ये पूछना तक मुनासिब नहीं समझा कि बिस्तर बिक्री गिरोह के खिलाफ कार्रवाई की क्या स्थिति है! सूत्रों का कहना है कि सरकार के स्तर पर एसएमएस मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य और उनके बनाए तंत्र को ही कोरोना से निपटने के लिए की जाने वाली खरीद का जिम्मा दिया हुआ है और करोड़ों रुपए की खरीद ​अपारदर्शी तरीके से की जा रही है।

कुप्रबंधन ही है राहुल की नाराजगी का कारण !

शायद कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी तक अशोक गहलोत सरकार के इस कुप्रबंधन की जानकारी पहुंच गई है, इसी के चलते उन्होंने 28 मई को नई दिल्ली में वर्चुअल प्रेस कांफ्रेंस में कांग्रेस शासित राज्यों में सिर्फ छत्तीसगढ़ की तारीफ की और गहलोत तथा अमरिंदर सिंह का नाम तक लेना गवारा नहीं किया।

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  • सभी सरकार नकारा है चाहे वो केंद्र हो या राज्य सरकार।