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भगवा कांग्रेस बनाम राहुल कांग्रेस के बीच खुली जंग, पांच राज्यों के चुनाव नतीजे तय करेंगे भगवा पगड़ी का भविष्य

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नई दिल्ली से कुमार उमेश

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कांग्रेस एक बार फिर इतिहास के अपने पुराने पन्नों को पलटने के लिए तैयार है। इंदिरा गांधी ने कांग्रेस के पुराने दिग्गजों से अलग होकर कांग्रेस आई बनाई थी। यही कांग्रेस आई वर्तमान की कांग्रेस है। इसी रास्ते पर अब उनके पोते चलने के लिए तैयार हैं। राहुल गांधी ने भी कांग्रेस के पुराने दिग्गजों से सीधी टक्कर ले ली है। पुराने दिग्गजों और पार्टी के धाकड़ कहे जाने वाले नेताओं ने राहुल गांधी के खिलाफ खुली बगावत कर दी है। इस बगावत के लिए दिग्गजों ने पांच राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनाव का समय चुना है। ताकि राहुल के नेतृत्व पर सवालिया निशान पक्का किया जा सके। ऐसे में अगर राहुल गांधी असफल होते हैं तो कांग्रेस विभाजन के रास्ते पर जा सकती है। लेकिन यह विभाजन इन नेताओं को कितना आगे तक ले जाएगा यह भविष्य के गर्भ में छुपा हुआ है, पर इतिहास बताता है कि गांधी परिवार के साथ चलने वाली कांग्रेस ही भविष्य में असली कांग्रेस बन जाती है।

सही होते दिख रहे राहुल के आरोप

कांग्रेस के पुराने दिग्गजों पर राहुल गांधी ने कभी यह आरोप लगाया था कि वह भाजपा के लिए काम करते हैं। इस पर पुराने दिग्गज बिलबिला उठे थे। उन्होंने समूह 23 के नाम से कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी को पार्टी के क्रिया कलापों को लेकर चिट्ठी लिखी थी। इसके कुछ महीने बाद इन नेताओं के साथ आलाकमान की बैठक हुई। जिसमें सबने जमकर अपनी भड़ास निकाली। बात आई गई हो गई। फिर धीरे धीरे लगने लगा कि सब कुछ सामान्य हो गया है। पर अंदर ही अंदर यह आग सुलगती रही। राहुल गांधी ने भी इन नेताओं को महत्व न देते हुए अपना काम जारी रखा। इससे इन नेताओं की बिलबिलाहट विद्रोह में बदल गई। विद्रोह के लिए बहाना चाहिए था इसलिए गुलाम नबी आजाद की राज्यसभा सदस्यता की विदाई को इसके लिए चुना गया। दोबारा राज्यसभा न भेजे जाने को लेकर सवाल उठाने के बहाने समूह 23 की असलियत सामने आ गई। इनकी असलियत उनकी वेशभूषा से ही समझ में आ जाती है। जम्मू में गुलाम नबी आजाद के नेतृत्व में जमा हुए समूह 23 के नेताओं ने भगवा पगड़ी बांध रखी था। भगवा रंग किस पार्टी का प्रतीक है, इसे सभी जानते हैं। इस रंग को सिरों पर धारण करके समूह 23 के नेताओं ने साफ कर दिया कि राहुल गांधी के आरोप दमदार थे।

नाम लिए बिना सभी ने राहुल पर किया हमला

इस मौके पर जुटे नेताओं ने कांग्रेस पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी और राहुल गांधी का नाम लिए बिना जमकर अपनी भड़ास निकाली। यहां तक कि पोस्टर में भी गांधी परिवार को जगह नहीं दी। आलम यह था कि उत्तर प्रदेश के पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष राजबब्बर ने इस समूह को ही असली कांग्रेस ठहराया। उन्होंने कहा कि लोग उन्हे जी 23 के नाम से पुकारते हैं, लेकिन असली में यह कांग्रेस का गांधी 23 है। जो कांग्रेस की मजबूती के लिए काम करता है। जबकि कांग्रेस सांसद सिब्बल ने गुलाम नबी आजाद को राज्यसभा पुन: न भेजे जाने को लेकर सवाल खड़ा किया। उन्होंने कहा कि गुलाब नबी के अनुभव का लाभ पार्टी क्यों नहीं उठा रही है? उन्होंने राहुल गांधी का नाम लिए बिना कहा कि कांग्रेस दिन प्रतिदिन कमजोर हो रही है। पार्टी में निर्णय कौन ले रहा है पता ही नहीं चलता है।

केरल में नहीं मिली सफलता तो विभाजन तय !

वहीं सांसद आनंद शर्मा ने भी कांग्रेस की नीतियों को लेकर सवाल उठाया। कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं की यह खुली बगावत पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव के बीच में आयी है। भाजपा के आक्रमण के बीच कांग्रेस नेताओं का ही राहुल गांधी पर होने वाला यह आक्रमण पार्टी को काफी नुकसान पहुंचा सकता है। केरल में सत्ता में आने का ख्वाब देख रहे राहुल गांधी के लिए इस हमले से उबरना आसान नहीं है। चुनावी गणित उलटा होने पर राहुल गांधी के लिए पार्टी को एकजुट रख पाना भी मुश्किल हो जाएगा। वरिष्ठ नेताओं ने बैठक कर यह संकेत तो दे ही दिए हैं कि उनके बिना कांग्रेस नहीं चल सकती है। इस संकेत को राहुल गांधी ने अनदेखा किया तो पार्टी में विभाजन तय है।

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