पत्रकारों के उत्पीडन को रोकने की गुहार लगाई

नई दिल्ली. पत्रकारों के खिलाफ सरकारी उत्पीडन मामलों में सम्पादकों की संस्था एडिटर्स गिल्ड फिर सामने आई है। इस बार उसने उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को रिपब्लिकन के सम्पादक अर्णब की गिरफ्तारी पर किए गए ट्वीट की याद दिलाते हुए कहा है कि आपने मुंबई में एक संपादक की गिरफ़्तारी पर प्रेस की स्वतंत्रता की बात उठाकर सही किया। अब समय आ गया है कि वे उत्तर प्रदेश में पत्रकारों को डराने-धमकाने और प्रताड़ित करने की घटनाओं को रोकें।

गिल्ड ने मुख्यमंत्री को लिखे पत्र में उत्तरप्रदेश की जेलों में पत्रकारों को रिहा करने और विचाराधीन मामलों को वापस लेने का आग्रह करते हुए राज्य में पत्रकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करने का अनुरोध किया। गिल्ड ने कहा है कि वह राज्य में बिना किसी भय के मीडिया के लिए एक सुरक्षात्मक वातावरण बनाने के लिए उत्तर प्रदेश प्रशासन और योगी आदित्यनाथ से मिलने के लिए राष्ट्रीय संपादकों का एक प्रतिनिधिमंडल लखनऊ भेजने का इच्छुक है।

एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया ने पत्र में लिखा है कि हाल में ऐसी कई घटनाएं सामने आईं हैं जो राज्य में स्वतंत्र पत्रकारिता के लिए माहौल को लेकर गहरी चिंता पैदा करती हैं। ज्ञात रहे कि योगी आदित्यनाथ ने रिपब्लिक टीवी के प्रधान संपादक अर्णब गोस्वामी की गिरफ्तारी की निंदा की थी। महाराष्ट्र की अलीबाग पुलिस ने रिपब्लिक टीवी के प्रधान संपादक अर्णब गोस्वामी को 2018 में हुए एक इंटीरियर डिज़ाइनर की आत्महत्या से जुड़े मामले में 4 नवंबर को उनके घर से गिरफ़्तार किया था।

एडिटर्स गिल्ड की अध्यक्ष सीमा मुस्तफा एवं अन्य पदाधिकारियों के हस्ताक्षरयुक्त पत्र में मलयालम समाचार पोर्टल अजीमुखम के दिल्ली में कार्यरत पत्रकार सिद्दीक कप्पन और वेबसाइट स्क्रॉल की कार्यकारी संपादक सुप्रिया शर्मा आदि पत्रकारों के खिलाफ उत्तर प्रदेश में दर्ज मामलों का उल्लेख किया गया है। एडिटर्स गिल्ड ने पत्र में रवींद्र सक्सेना का भी उल्लेख किया है, जिन्होंने सीतापुर की महोली तहसील के क्वारंटीन केंद्र के कुप्रबंधन का खुलासा किया था। उन पर एससी/एसटी अधिनियम और आपदा प्रबंधन अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया था। इसके अलावा स्थानीय दैनिक जनादेश टाइम्स के विजय विनीत और मनीष मिश्रा पर मामला दर्ज किया गया था जिन्होंने वाराणसी जिले के कोइरीपुर गांव में घास खाते बच्चों के बारे में रिपोर्ट दी थी। लखनऊ के स्वतंत्र पत्रकार असद रिज़वी पर दो अक्टूबर को पुलिस ने तब हमला किया, जब वे हाथरस बलात्कार मामले को लेकर शहर में हो रहे विरोध प्रदर्शन पर रिपोर्ट कर रहे थे।

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