नई दिल्ली. लद्दाख सीमा पर चीनी सैनिकों की चुनौती का सामना कर रहे भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी इन दिनों सिर्फ इशारे का उपयोग कर रहे हैं। चीन का सीधा नाम लेने से पिछले पांच माह से बच रहे प्रधानमंत्री ने एक बार फिर विस्तारवाद के लिए चीन को आड़े हाथ लेते हुए कहा कि विस्तारवाद मानसिक विकृति और अठ्ठारहवीं शताब्दी की सोच है।

रणनीति स्पष्ट, आजमाने की कोशिश की तो…..

राजस्‍थान के लोंगेवाला में सैनिकों के साथ दीपावली मनाने आये मोदी ने जाबांजों से कहा कि आप भले बर्फीली पहाड़ियों पर रहें या फिर रेगिस्तान में, उनकी दीपावली तो आपके बीच आकर ही पूरी होती है। सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) महानिदेशक राकेश अस्थाना, चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ बिपिन रावत और सेना प्रमुख एम एम नरवणे के साथ आए मोदी ने कहा कि भारत की रणनीति स्पष्ट और साफ है। भारत समझने और समझाने की नीति पर विश्वास करता है लेकिन आज़माने की कोशिश होती है तो जवाब भी प्रचंड मिलता है।
सीमा पर रहकर सैनिक जो त्याग और तपस्या करते हैं, उससे देश निश्चिंत रहता है।

पराक्रम से बढ़ा है भारत का कद

चीन का नाम लिये बिना मोदी ने कहा कि पूरा विश्व विस्तारवादी ताकतों से परेशान हैं लेकिन इस सोच के खिलाफ भारत प्रखर आवाज बन गया है। दुनिया ये जान रही है, समझ रही है कि ये देश अपने हितों से किसी भी कीमत पर रत्ती भर भी समझौता करने वाला नहीं है। भारत का ये रुतबा, ये कद सैनिकों की शक्ति और पराक्रम के कारण है।

मोदी ने सैनिकों को संबोधन की शुरुआत में कहा कि मैं आज आपके बीच प्रत्येक भारतवासी की शुभकामनाएं लेकर आया हूं, आपके लिए प्यार लेकर आया हूं, आशीष लेकर आया हूं। मैं आज उन वीर माताओं-बहनों और बच्चों को भी दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएं देता हूं, उनके त्याग को नमन करता हूं, जिनके अपने सरहद पर हैं। आपके शौर्य को नमन करते हुये आज भारत के 130 करोड़ देशवासी आपके साथ मजबूती से खड़े हैं। प्रत्येक भारतवासी को सैनिकों की ताकत और शौर्य पर गर्व है। दुनिया का इतिहास बताता है कि केवल वही राष्ट्र सुरक्षित रहे हैं, जिनके भीतर आक्रांताओं का मुकाबला करने की क्षमता थी। हाल ही में हमारी सेनाओं ने निर्णय लिया है कि वो 100 से ज्यादा हथियारों और साजो-सामान विदेश से नहीं मंगवाएंगी। सेना के इस फैसले से देशवासियों को भी लोकल के लिए वोकल होने की प्रेरणा मिली है।

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