जयपुर. किसान अधिकार दिवस पर जयपुर के सिविल लाइन फाटक पर किए गए प्रदर्शन में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के शामिल नहीं होने से राजनीतिक चर्चाओं का बाजार गरम है। प्रदर्शन में पूर्व उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट सहित कई मंत्री और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा मौजूद थे।

पायलट समर्थकों का कहना है कि पूरे प्रदर्शन में सचिन पायलट के छा जाने की वजह से मुख्यमंत्री ने ऐन वक्त पर वहां नहीं आने का संदेश भिजवा दिया। जयपुर में सिविल लाइंस फाटक पर किए गए प्रदर्शन और राजभवन के घेराव के इस आंदोलन में कांग्रेसी नेता, मंत्री और कार्यकर्ता बड़ी संख्या में पहुंचे।

आंदोलन को संबोधित करते हुए पायलट ने केंद्र सरकार पर हमला करते हुए कहा कि केंद्र ने किसानों यानी देश के अन्नदाता पर हमला बोला है। उन्हें नक्सलवादी कहा, आतंकवादी कहा। उन्होंने केन्द्र और भाजपा की आलोचना करते हुए कहा कि किसानों पर इस तरह के हमले बर्दाश्त किए जाने लायक नहीं हैं।

प्रदर्शन के बाद सभा के लिए सिविल लाइंस फाटक के बाहरी हिस्से पर मंच बनाया गया। सभा के बाद राज्यपाल को ज्ञापन दिया गया। इससे पहले सरकारी मुख्य सचेतक महेश जोशी ने धरना प्रदर्शन में आने वाले लोगों से कोरोना के नियमों की पालना की अपील की। उन्होंने कहा है कि सभी कार्यकर्ता सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करें और मास्क लगाकर रखें।

प्रदर्शन के लिए राजमहल होटल के टी-पॉइंट पर वाहनों को रोक दिया गया। उनको वहीं से डायवर्ट किया गया। राजमहल होटल के टी-पाइंट से सिविल लाइंस की तरफ आने वाले सभी वाहनों की आवाजाही को रोक दिया गया। करीब 200 मीटर के दायरे में सिविल लाइन फाटक के पास सभा स्थल बनाया गया।

प्रदर्शन में बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं की मौजूदगी के बावजूद मुख्यमंत्री का नहीं पहुंचने को राजनीतिक जानकार सचिन पायलट और मुख्यमंत्री के बीच मुख्यमंत्री को हटाने के अभियान के दौरान उत्पन्न खटास अभी तक बाकी मान रहे हैं। माना जा रहा है कि मुख्यमंत्री सचिन पायलट के साथ मंच साझा करने से बचना चाहते हैं और बहुत मजबूरी होने पर ही उनके साथ एक मंच पर नजर आना चाहते हैं।

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