इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने कार्रवाई पर लगाई रोक

नई दिल्ली. उत्तरप्रदेश के इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने उस व्यक्ति के खिलाफ पुलिस कार्रवाई पर रोक लगा दी है जिस पर आरोप है कि उसने किसी अन्य की पत्नी को धर्म परिवर्तन करने के लिए राजी किया था और इसके लिए उसे एक मोबाइल फोन भी खरीद कर दिया था। शिकायतकर्ता महिला का पति है।

न्यायाधीश पंकज नकवी और विवेक अग्रवाल की खंडपीठ ने नदीम नामक मजदूर की याचिका पर सुनवाई के बाद पुलिस को बल प्रयोग नहीं करने का निर्देश दिया। नदीम के खिलाफ मुजफ्फरनगर जिले के मंसूरपुर पुलिस थाने में एफआईआर दर्ज है। नदीम के वकील एसएफए नकवी ने दलील दी कि अध्यादेश भारत के संविधान के खिलाफ है और इसके प्रावधानों के तहत शुरू की गई आपराधिक कार्रवाई रद्द की जानी चाहिए। नदीम ने अपने खिलाफ आईपीसी की धारा 504, 506 और 120 बी और गैर कानूनी धर्म परिवर्तन निषेध अध्यादेश, 2020 की धारा 3/5 के तहत दर्ज एफआईआर रद्द करने की मांग की थी।

एफआईआर में आरोप है कि नदीम शिकायतकर्ता का परिचित था और अक्सर उसके घर आया जाया करता था। शिकायतकर्ता की पत्नी से जान पहचान का नाजायज फायदा उठाकर उसने धर्म परिवर्तन के लिए उसे राजी करने का प्रयास किया ताकि वह उससे शादी कर सके। इस उद्देश्य के लिए नदीम ने एक मोबाइल फोन खरीद कर शिकायतकर्ता की पत्नी को फोन उपहार में दिया।
दलीलें सुनने के बाद अदालत ने कहा कि हमारे समक्ष कोई ऐसा तथ्य पेश नहीं किया गया जिससे साबित हो कि याचिकाकर्ता द्वारा शिकायतकर्ता की पत्नी का धर्म परिवर्तन कराने के लिए कोई बलपूर्वक प्रक्रिया अपनाई गई हो। शिकायतकर्ता की पत्नी वयस्क है जो अपना भला बुरा समझती है। उसके और याचिकाकर्ता के पास निजता का मौलिक अधिकार है और उन्हें अपने कथित रिश्तों के परिणामों की भलीभांति जानकारी है।

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