केन्द्र के आदेश को अदालत में चुनौती

नई दिल्ली। अगर कोई एकल दुकानदार अथवा छोटा व्यवसायी आनलाइन कारोबार करना चाहे तो उसे कम्पनी का गठन करना होगा। ऐसा नहीं करने पर वह आनलाइन कारोबार नहीं कर सकता है।
केन्द्र सरकार के उपभोक्ता मंत्रालय के बनाए हुए इन नियमों को एक व्यक्ति ने दिल्ली उच्च न्यायालय में चुनौती दी है। उसकी याचिका पर दिल्ली उच्च न्यायालय ने उपभोक्ता संरक्षण (ई-कॉमर्स) नियमों के उस खास प्रावधान पर केंद्र से जवाब मांगा है। इस प्रावधान के तहत वस्तुओं और सेवाओं की ऑनलाइन बिक्री करने वाली इकाई के लिए भारत में कंपनी के रूप में पंजीकरण कराना अनिवार्य है।

हाईकोर्ट में याचिकाकर्ता ध्रुव सेठी ने दलील दी कि ये नियम एकल स्वामित्व वाले कारोबार के लिए कंपनी के रूप में पंजीकरण को अनिवार्य बनाता है। इससे कंपनी के रूप में पंजीकरण के बिना ई-कॉमर्स कारोबार नहीं किया जा सकता है।

इस नियम की वजह से प्रत्येक ऐसा कारोबार जो कंपनी नहीं है, वह ई-कॉमर्स क्षेत्र से बाहर हो जाएगा या फिर उसे उत्पादों की बिक्री अमेजन या फ्लिपकार्ट इत्यादि के जरिये करनी पड़ेगी। अदालत ने सुनवाई के दौरान सुझाव दिया कि याचिकाकर्ता अमेजन पर सूचीबद्ध होकर अपने उत्पादों और सेवाओं की बिक्री कर सकता है। याचिकाकर्ता का कहना था कि ऐसा करने पर उसे अमेजन को भुगतान करना होगा।

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