नई दिल्ली. कोवैक्सीन और कोविशील्ड नामक वैक्सीन को मंजूरी मिलते ही विपक्षी दलों के सरकार पर हमले को दरकिनार कर दें तो भी चिकित्सा विशेषज्ञों के ठोस तर्क कहते हैं कि सरकार ने वैक्सीन को मंजूरी देने में जल्दबाजी से काम लिया है।

मीडिया में आई खबरों के मुताबिक प्रसिद्ध संक्रामक रोग विशेषज्ञ डॉक्टर जयप्रकाश मुलयिल ने मंजूरी को काफ़ी जल्दबाज़ी में उठाया गया कदम बताया है। दवाओं के इस्तेमाल पर नज़र रखने वाले ऑल इंडिया ड्रग एक्शन नेटवर्क ने भी आपात मंजूरी को चौंकाने वाला बताया है।

अपनी ही ड्राफ्ट गाइड लाइंस का उल्लंघन

संगठन की सह-संयोजक मालिनी आइसोला के अनुसार तीसरे चरण के ट्रायल से जुड़े आंकड़ों के आने से पहले कोवैक्सीन को मंजूरी केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन की उस ड्राफ़्ट गाइड लाइंस का उल्लंघन है, जो वैक्सीन बनाने के लिए 21 सितंबर, 2020 को प्रकाशित की गई थी।

ड्राफ़्ट गाइडलाइंस में कोविड 19 वैक्सीन की प्रभावकारिता (इफिकेसी) कम से कम पचास फ़ीसद तक होना जरूरी बताया गया है, लेकिन वैक्सीन की इफिकेसी से जुड़े आंकड़े ही उपलब्ध नहीं हैं।

नहीं बताई क्लिनिकल मोड की परिभाषा

रेगुलेटर ने जिस क्लिनिकल मोड का उल्लेख किया है, उसकी परिभाषा तक उपलब्ध नहीं है। इसलिए लोगों को ये स्पष्ट रूप से बताया जाना चाहिए कि वैक्सीन का इफिकेसी डेटा उपलब्ध नहीं है और वह तीसरे चरण के ट्रायल में है। सवाल है कि वैक्सीन के नतीजे बेहतर रहे हैं तो डेटा उजागर करने में झिझक क्यों?

नहीं है आपात स्थिति तो……

वेल्लोर क्रिश्चियन मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल रहे संक्रामक रोग विशेषज्ञ डॉक्टर जयप्रकाश मुलयिल का कहना है कि इस वैक्सीन को मंज़ूरी दिया जाना जल्दबाज़ी है। क्योंकि इस समय आपात स्थिति नज़र नहीं आ रही है। कोरोना वायरस के नए मामलों की संख्या घट रही है और मौतों की संख्या में भी कमी आ रही है।

वैक्सीन बनाने वाली कंपनी भारत बायोटेक के सीइओ ने सोमवार शाम प्रेस कॉन्फ्रेंस करके बताया कि वे एक हफ़्ते के अंदर दावों को सिद्ध करने के लिए डेटा प्रस्तुत करेंगे। उनका दावा है कि टीका सम्बंधी 70 से ज्यादा लेख अंतरराष्ट्रीय जर्नल्स में प्रकाशित हो चुके हैं।

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