शिवसेना की राय

नई दिल्ली. शिवसेना ने परोक्ष रूप से कहा है कि देश के विपक्षी दल खतरे में है और उन्हें इससे निपटने के लिए संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन अर्थात यूपीए के बैनर तले एकत्रित हो जाना चाहिए। पार्टी ने यह राय अपने मुखपत्र सामना के सम्पादकीय में दी है।

सामना ने कहा है कि राष्ट्रीय स्तर पर विपक्षी दल कांग्रेस ‘कमजोर और बिखरी हुई’ है। केंद्र के किसान आंदोलन के प्रति उदासीन रवैयके लिए भी उसने निष्प्रभावी विपक्ष को मुख्य वजह माना है। इस स्थिति में केंद्र सरकार पर दोषारोपण के बजाय मुख्य विपक्षी दल को अपने नेतृत्व के मुद्दे को लेकर आत्मावलोकन करना चाहिए। किसान राष्ट्रीय राजधानी की सीमा पर प्रदर्शन कर रहे हैं, लेकिन दिल्ली के शासक इसके प्रति उदासीन है। बिखरा एवं कमजोर विपक्ष इसकी मुख्य वजह है।

राहुल गांधी व्यक्तिगत रूप से कड़ी टक्कर दे रहे हैं लेकिन कुछ कमी रह जा रही है। संप्रग के घटकों ने भी किसान प्रदर्शन को गंभीरता से नहीं लिया। पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी अकेले लड़ाई लड़ रही हैं। तृणमूल कांग्रेस, शिवसेना, अकाली दल, बहुजन समाज पार्टी, आखिलेश यादव, जगनमोहन रेड्डी की वाईएसआर कांग्रेस, के चंद्रशेखर राव, नवीन पटनायक, एच डी कुमारस्वामी सभी भाजपा विरोधी हैं, लेकिन जब तक वे संप्रग के साथ नहीं जुड़ते तब तक विपक्ष मजबूत विकल्प नहीं दे सकता।

दिल्ली में प्रियंका गांधी को गिरफ्तार कर लिया गया, राहुल गांधी का सार्वजनिक उपहास किया, महाराष्ट्र में ठाकरे सरकार को काम नहीं करने दिया रहा, भाजपा नेता ऑन रिकार्ड कहते हैं कि मध्य प्रदेश में कमलनाथ सरकार को गिराने में प्रधानमंत्री की भूमिका अहम थी यह सब लोकतंत्र के लिए अच्छी बात नहीं है। स्थिति और नहीं बिगड़े, यह सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी कांग्रेस की है।

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