दिल्ली ब्यूरो
नई दिल्ली. दिल्ली में 26 जनवरी को होने वाली ट्रैक्टर परेड ठीक वैसी ही होगी जैसी राजपथ पर होती है। परेड में शामिल ट्रैक्टरों पर खेती-किसानी सम्बंधी झांकियां सजी होंगी और उनमें बताया जाएगा कि फल, सब्जी, अनाज कैसे उगाया जाता है।

परेड के लिए किसानों ने ट्रैक्टरों को उसी तरह तैयार किया है जैसे वो किसी मेले में जाते वक्त करते हैं। ज़्यादातर ट्रैक्टरों पर लोहे के बक्से लगाए गए हैं। ताकि पानी की तेज़ बौछारों, आंसू गैस के गोलों या लाठीचार्ज से बचा जा सके। बड़े और भारी अवरोध हटाने के लिए उन्हें क्रेन की तरह बना दिया गया है। बंपरों के सामने लोहे के गर्डर आदि लगा दिए गए हैं ताकि बाधाओं को तोड़ना मुश्किल न हो।

तीस फीसदी ट्रैक्टरों पर होंगी झांकियां

किसान नेताओं ने कहा है कि किसानों की परेड में झाकियों को उसी तरह से शामिल किया जाएगा, जैसे सरकारी परेड में विभिन्न राज्यों की झाकियों को शामिल किया जाता है। हिमाचल और जम्मू-कश्मीर के किसान अपनी झाकियों में दिखाएंगे कि पहाड़ी इलाक़ों में फल कैसे उगाए जाते हैं। पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश की झाकियां इन राज्यों की धार्मिक और सामाजिक संस्कृति के साथ-साथ किसान जीवन को भी प्रदर्शित करेंगी। अगर एक लाख ट्रैक्टर परेड में शामिल होते हैं तो उनमें से 30 प्रतिशत में किसान जीवन से जुड़ी झाकियां होंगी।

बाबा बंदा सिंह बहादुर का होगा पोस्टर

किसानों के संगठनों के झंडों के साथ-साथ तिरंगा, ख़ालसा प्रतीक और लाल झंडों सहित अन्य संगठनों के झंडे ट्रैक्टरों पर दिखेंगे। हर संगठन को किसानी झंडे और अपनी विचारधारा के अनुसार झंडा लगाने की आज़ादी है। ट्रॉलियों पर बाबा बंदा सिंह बहादुर के चित्रों के साथ बड़ी संख्या में बैनर भी हैं। ज्ञात रहे कि बाबा बंदा सिंह बहादुर ने 1709 में समाना शहर की घेराबंदी करके खेती करने वाले किसानों को ज़मीन का मालिक बनाने का करतब दिखाया था। इसी तरह भाई बघेल सिंह और जस्सा सिंह रामगढ़िया के चित्रों वाले बैनर भी लगे हुए दिखेंगे। बघेल सिंह एक ऐसा व्यक्तित्व था जिसने दिल्ली को अपने दम पर जीत लिया था।

40 से अधिक किसान संगठनों के संयुक्त संगठन, संयुक्त किसान मोर्चा के अनुसार, दिल्ली के सिंघु, टिकरी, ग़ाज़ीपुर, पलवल और शाहजहांपुर सीमाओं से ट्रैक्टर परेड होगी। दिल्ली पुलिस और किसान संगठनों के बीच तय कार्यक्रम के अनुसार, 26 जनवरी को राजपथ पर आधिकारिक गणतंत्र दिवस परेड की समाप्ति के तुरंत बाद किसानों की परेड शुरू होगी। लगभग 100 किमी की दूरी तय करने के बाद ये शाम छह बजे तक समाप्त हो जाएगी।

धरना स्थल पर बनाए गए हैं वॉररूम 

इसके लिए युद्ध स्तर पर तैयारी की गई है और प्रत्येक धरना स्थल पर वॉररूम बनाए गए हैं, जो ट्रैक्टर परेड के लिए आवश्यक व्यवस्था करने में जुटे हुए हैं। वॉररूम में 40 सदस्यीय टीम बनाई गई है, जिसमें डॉक्टर, सुरक्षाकर्मी और सोशल मीडिया मैनेजर शामिल हैं। जहां से ट्रैक्टर परेड गुज़रेगी, वहां 40 एंबुलेंसों को सड़कों पर खड़ा किया जाएगा।

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