नई दिल्ली. केंद्र के कृषि कानूनों के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे किसान दिल्ली के बाहरी रिंग रोड पर ट्रैक्टर परेड निकालेंगे। इसके साथ ही गणतंत्र दिवस पर टकराव की आशंकाएं समाप्त हो गई हैं लेकिन सरकार ने गणतंत्र दिवस पर विरोध प्रदर्शन को देश की इज्जत से जोड़ते हुए उच्चतम न्यायालय से उस पर रोक लगाने के लिए याचिका दायर की है।

प्रदर्शनकारी किसानों की यूनियनों ने रविवार को कहा है कि वे गणतंत्र दिवस पर दिल्ली में अपनी प्रस्तावित ट्रैक्टर परेड निकालेंगे। यूनियन नेता योगेंद्र यादव ने सिंघू सीमा स्थित प्रदर्शन स्थल पर संवाददाता सम्मेलन में कहा कि हम गणतंत्र दिवस पर दिल्ली में बाहरी रिंग रोड पर एक ट्रैक्टर परेड करेंगे। परेड शांतिपूर्ण होगी। गणतंत्र दिवस परेड में कोई भी व्यवधान नहीं होगा। किसान अपने ट्रैक्टरों पर राष्ट्रीय ध्वज लगाएंगे।

इस बीच सरकार ने किसानों द्वारा प्रस्तावित ट्रैक्टर मार्च या ऐसे किसी अन्य प्रकार के विरोध प्रदर्शन पर रोक की मांग को लेकर उच्चतम न्यायालय का रुख किया है ताकि 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस समारोह में किसी तरह की बाधा न आये। यह मामला अदालत में लंबित है।

एक दूसरी किसान यूनियन के नेता दर्शन पाल सिंह ने आरोप लगाया कि राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) उन लोगों के खिलाफ मामले दर्ज कर रही है जो विरोध प्रदर्शन का हिस्सा हैं या इसका समर्थन कर रहे हैं। पाल ने कहा कि सभी किसान यूनियन इसकी निंदा करती हैं। पाल का इशारा एनआईए की ओर से भेजे गए उन समन की ओर था, जिन्हें प्रतिबंधित संगठन सिख्स फॉर जस्टिस संगठन से जुड़े एक मामले में किसान यूनियन नेता को कथित तौर पर जारी किया गया है। दिल्ली के बाहर चल रहे प्रदर्शन में मुख्य रूप से पंजाब, हरियाणा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के हजारों किसान हिस्सा ले रहे हैं।

केंद्र सरकार ने तीन कृषि कानूनों को किसानों की आय बढ़ाने के उद्देश्य से प्रमुख कृषि सुधारों के रूप में प्रस्तुत किया है, लेकिन प्रदर्शनकारी किसानों की चिंता है कि ये कानून न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) और मंडी व्यवस्था को कमजोर करेंगे उन्हें बड़े कॉरपोरेट की दया पर छोड़ देंगे।

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