नई दिल्ली. केन्द्र सरकार के तीन कृषि कानूनों के खिलाफ लगभग डेढ़ माह से दिल्ली के बार्डर पर बैठे किसानों ने 26 जनवरी की किसान परेड़ की रिहर्सल ट्रैक्टर रैली निकाल कर की। किसानों ने गुरूवार को सिंधू, टिकरी और गाजीपुर बॉर्डर और हरियाणा के रेवासन में ट्रैक्टर रैली निकालकर विरोध प्रकट किया। किसान नेताओं ने इसे 26 जनवरी को हरियाणा, पंजाब और उत्तर प्रदेश के विभिन्न हिस्सों से राष्ट्रीय राजधानी में आने वाले ट्रैक्टरों की प्रस्तावित परेड से पहले की रिहर्सल बताया है।

खबरों के अनुसार भारतीय किसान यूनियन (एकता उगराहां) के प्रमुख जोगिंदर सिंह उगराहां ने कहा कि 3500 से ज्यादा ट्रैक्टरों और ट्रॉलियों के साथ किसान मार्च में हिस्सा लिया। पंजाब के बड़े किसान संगठनों में से एक उगराहां का दावा है कि किसान तीन कानूनों को वापस लेने के अलावा किसी बात पर राजी नहीं होंगे। केन्द्र सरकार और किसान संगठनों के बीच शुक्रवार को आठवें दौर की बातचीत होनी है। किसान संगठनों और तीन केंद्रीय मंत्रियों के बीच सोमवार को सातवें दौर की बैठक बेनतीजा रही थी।

सुरक्षाकर्मियों की भारी तैनाती के बीच ट्रैक्टर पर सवार किसानों ने सुबह 11 बजे कुंडली-मानेसर-पलवल एक्सप्रेसवे की ओर मार्च शुरू किया। ट्रैक्टरों पर बैठे किसानों का उनका मनोबल बढ़ाने के लिए स्पीकरों में गीत बज रहे थे। भारी मात्रा में किसान मूंगफली, नाश्ता, चाय, और समाचार पत्रों आदि सामान के साथ रास्तों में खड़े थे। गाजीपुर से भाकियू नेता राकेश टिकैत की अगुवाई में ट्रैक्टर मार्च पलवल की तरफ किया गया। संयुक्त किसान मोर्चा के अभिमन्यु कोहाड़ के अनुसार मार्च में हरियाणा से करीब 2500 ट्रैक्टर आए। अगर सरकार मांगें स्वीकार नहीं करेगी तो आंदोलन तेज किया जाएगा।

ट्रैक्टर रैलियां सिंधू से टिकरी बॉर्डर, टिकरी से कुंडली, गाजीपुर से पलवल और रेवासन से पलवल की ओर निकाली गई। ट्रैक्टर रैली में हिस्सा ले रहे हरजिंदर सिंह का कहना है कि सरकार एक के बाद एक बैठक कर रही है। उन्हें पता है हमें क्या चाहिए। हम चाहते हैं कि कानून वापस लिए जाए लेकिन हमें सिर्फ बेकार की बैठकें मिल रही हैं। इस रैली के जरिए, हम 26 जनवरी को क्या करेंगे उसकी सिर्फ एक झलक दिखा रहे हैं। आज की रैली, केवल दिल्ली की सीमा पर हो रही है, लेकिन किसान नेता राजधानी में दाखिल होने का निर्णय करेंगे, तो हम वह भी करेंगे।

भीषण ठंड, बारिश के बावजूद पंजाब, हरियाणा सहित देश के कुछ अन्य भागों के हजारों किसान पिछले 40 दिनों से ज्यादा समय से दिल्ली की अलग-अलग सीमाओं पर डटे हुए हैं। प्रदर्शन कर रहे किसान संगठनों का कहना है कि इन कानूनों से एमएसपी का सुरक्षा कवच खत्म हो जाएगा और मंडियां भी खत्म हो जाएंगी तथा खेती बड़े कारपोरेट समूहों के हाथ में चली जाएगी।

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