दवा विक्रेता और निर्माताओं को मालामाल कर गया कोरोना

नई दिल्ली. कोरोना ने भले ही लाखों की जान ले ली लेकिन व्यापारियों और निर्माताओं के एक खास तबके ने आठ-नौ माह में इतनी कमाई कर ली, जितनी अगले दस साल में नहीं होती। तिजोरियों को भरने वाले इस तबके में मेडिकल स्टोर्स, आयुर्वेदिक दवा और नुस्खे तथा शराब निर्माता तथा विक्रेता शामिल हैं।

इस कमाई में मीडिया की विशेष भूमिका रही जिसने तथ्यों की जांच-पड़ताल किए बिना इम्युनिटी बूस्टर्स का प्रचार किया। नतीजा इम्यूनिटी बनाए रखने और बीमारी से बचने के लिए लोगों ने इम्यूनिटी बूस्टर्स और विटामिन्स ख़रीदने शुरू कर दिए। देश जब लॉकडाउन से बाहर आ रहा था तो विटामिन सी, ज़िंक और आयुष काढ़े की मांग 100 प्रतिशत बढ़ गई। उनकी बिक्री मुंहमांगे दामों पर की गई।

ऑनलाइन फार्मेसी नेटमेड्स ने अप्रैल-मई में मल्टीविटामिन्स की फरवरी-मार्च के मुक़ाबले 119 प्रतिशत अधिक बिक्री की। इसी अवधि में च्यनवप्राश और मछली तेल से बने कैप्सूलों की बिक्री 47 प्रतिशत तक अधिक रही।

पैरासिटामॉल और एज़िथ्रोमाइसीन की बिक्री ने रिकार्ड तोड़ दिए। इसके अलावा भारी संख्या में थर्मामीटर्स, विक्स की गोलियां और नाक के ड्रॉप ऑट्रिविन खरीदे गए। विटामिन सी और डी के साथ आयरन की गोलियों के इतने स्ट्रिप बेचे गए जितने पूरे भारत में अगले दस साल में भी नहीं बिकेंगे।

हरियाणा में शराब के एक ठेकेदार के अनुसार 15 साल में पहली बार हरियाणा के शराब ठेकेदारों ने देसी शराब का अतिरिक्त कोटा ख़रीदा। आयातित शराब के दो लाख कार्टन चार महीनों में बिक गए जबकि इतने कार्टन की बिक्री दो साल में होती है।

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