नई दिल्ली. लगता है रिपब्लिक टीवी के प्रधान संपादक अर्णब गोस्वामी की मुश्किलें फिर बढ़ने वाली हैं क्योंकि उनके और टेलीविजन रेटिंग एजेंसी बीएआरसी के पूर्व सीईओ पार्थ दासगुप्ता के बीच हुई कथित बातचीत की व्हाट्सएप चैटिंग वायरल होने के बाद विपक्षी दल संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) का गठन करने की मांग कर रहे हैं। अगर संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) का गठन वाकई हो गया तो अर्णब के साथ ही मोदी सरकार की राजनीतिक ​कठिनाइयां भी बढ़ सकती हैं। शरद पवार की राष्ट्रीय कांग्रेस पार्टी ने इस मुद्दे पर जेपीसी गठन की मांग उठाई है।

मीडिया में वायरल उस कथित बातचीत जिसमें गोस्वामी को बालाकोट हवाई हमले के बारे में कई गुप्त जानकारियों का पता होने का खुलासा हुआ है, उसे शरद राष्ट्रीय कांग्रेस पार्टी ने बेहद स्तब्ध व परेशान करने वाला बताया है। पार्टी ने सवाल उठाया है कि कैसे राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मुद्दे का इस्तेमाल टीआरपी पाने के लिए किया गया। राकांपा के प्रमुख प्रवक्ता इस मुद्दे पर महाराष्ट्र के गृह मंत्री अनिल देशमुख से मुलाकात करेंगे और ‘चैटगेट’ पर केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह से स्पष्टीकरण मांगेंगे।
राकांपा का कहना है कि सवाल यह भी उठता है कि अर्णब को कैसे इतनी संवेदनशील जानकारियां पता थी। गृह मंत्रालय को तुरंत इस सूत्र का पता करना चाहिए और तत्काल कार्रवाई करनी चाहिए। ज्ञात रहे कि गोस्वामी मुम्बई पुलिस और महा विकास अघाड़ी सरकार (एमवीए) की छवि खराब करने में सबसे आगे रहे हैं।

राकांपा का कहना है कि टीवी पर बहस के दौरान उन्होंने पालघर घटना को साम्प्रदायिक रूप देने की कोशिश की। सुशांत सिंह राजपूत की मौत के मामले में मुद्दे को विषय से भटकाया और गलत व्याख्यान पेश किया। यह सब कुछ केवल एमवीए सरकार को बदनाम करने के लिए किया गया। भाजपा को अर्णब गोस्वामी पर अपना रुख स्पष्ट करना चाहिए।

गौरतलब है कि ब्रॉडकास्ट ऑडियंस रिसर्च काउंसिल (बीएआरसी) के पूर्व सीईओ दासगुप्ता को मुम्बई पुलिस की अपराध शाखा ने गत वर्ष 24 दिसम्बर को कथित टीआरपी हेराफेरी मामले में गिरफ्तार किया था। मधुमेह का स्तर बढ़ने के बाद दासगुप्ता सरकारी जे. जे. अस्पताल में भर्ती है। मुम्बई पुलिस ने अदालत को बताया था कि रिपब्लिक टीवी के प्रधान संपादक अर्णब गोस्वामी ने समाचार चैनल के दर्शकों की संख्या बढ़ाने के लिए दासगुप्ता को लाखों रुपये की रिश्वत कथित तौर पर दी थी।

Leave a comment

Your email address will not be published.