जयपुर. प्रदेश के सरपंच ग्राम पंचायतों के पीडी (पर्सनल डिपॉजिट) खाते खोलने के विरोध में हैं। वे ग्राम पंचायतों के खाते जारी रखना चाहते हैं। वे चाहते हैं कि विकास योजनाओं का पैसा निजी खातों में ही आता रहे। जानकार सरपंचों के विरोध के पीछे पैसे के दुरूपयोग पर लगाम लग जाने की आशंका मान रहे हैं। जबकि सरपंचों का कहना है कि इससे विकास की राह में रोडे बिछ जाएंगे।

राज्य सरकार ने पिछले दिनों निर्णय लिया था कि वह योजनाओं का पैसा सरपंचों के निजी खातों की अपेक्षा पीडी एकाउंट में भेजेगी। सरपचं इसी का विरोध कर रहे हैं। विरोध में ग्राम पंचायतों पर तालंबदी की गई। पीडी खाता अर्थात निजी निक्षेप खाता सरकारी खाता होता है। इस पर वित्त विभाग का नियंत्रण रहता है।

सरपंचों ने ग्राम पंचायत मुख्यालयों पर गुरुवार को तालेबंदी के साथ प्रदर्शन किए। सरपंच संघ ने विरोध जारी रखने और आंदोलन तेज करने की चेतावनी दी है। जबकि सरकार का तर्क है कि कोविड से पैदा हालात को देखते हुए बेहतर वित्तीय प्रबंधन के लिए नई व्यवस्था लागू की है।

सरंपच संघ का तर्क है कि ग्राम पंचायतों के पीडी खाते खोलने से ब्याज नहीं मिलेगा। अब तक ग्राम पंचायतों के खुद के खाते होने से उनमें जमा पैसे का ब्याज पंचायतों की निजी आय होती थी। अब यह आय बंद हो जाएगी। पंचायतों के पास अब निजी आय के साधन नहीं है। इसके अलावा पीडी खाते खोलने के बाद छोटे से छोटे काम का पैसा भी ट्रेजरी से लेना होगा। अगर सरकार के पास फंड की कमी हुई तो ट्रेजरी से पंचायतों को पैसा देरी से मिलेगा।

सरपंच संघ अध्यक्ष बंशीधर गढ़वाल के अनुसार सरकार पंचायतों के पीडी खाते खोलकर ग्राम पंचायतों के विकास के फंड का पैसा खुद रखना चाहती है। पीडी खाते खाेलने से पंचायतों की वित्तीय स्वायत्तता खत्म हो जाएगी, छोटे से छोटे काम के लिए ट्रेजरी से पैसा लेने जाना होगा और इस पूरी प्रक्रिया में समय लगने के साथ-साथ विकास के काम प्रभावित होंगे।

Leave a comment

Your email address will not be published.