जयपुर. इंग्लैंड के प्रतिष्ठित अखबार ‘द सन’ ने अनुकरणीय चिकित्सा कौशल के लिए जयपुर निवासी डॉ. मयंक अग्रवाल को टॉप डॉक्टर्स ‘हेल योर हीरोज’ अवार्ड दिया है। कोविड महामारी के दौरान फ्रंट लाइन वॉरियर के रूप में निस्वार्थ योगदान के लिए ये सम्मान दिया गया है। अपने फेफड़ों में परेशानी होने के बावजूद उन्होंने स्वयं के स्वास्थ्य को जोखिम में डाला और दक्षिण लंदन स्थित क्रॉयडन हैल्थ सर्विसेज एनएचएस ट्रस्ट में गंभीर रूप से बीमार मरीजों की मदद की।

यहां बता दें कि महामारी के शुरूआती दौर में ही डॉ. अग्रवाल ने पिता को खो दिया। भारत लौटकर पिता से मिलने में असमर्थ, डॉ. मयंक ने पिता को वीडियो कॉल्स पर बीमारी से संघर्ष करते देखा। बड़ी व्यक्तिगत क्षति के बावजूद उन्होंने अपना पूरा ध्यान दूसरों की मदद पर केंद्रित रखा। उनके परिवार ने उन्हें घर पर रहने और खुद को संभालने के लिए कहा लेकिन उन्होंने अपनी टीम का सपोर्ट करने और अपने चिकित्सा कौशल से जरूरतमंद लोगों की मदद करने का फैसला किया। उल्लेखनीय है कि डॉ. अग्रवाल की स्कूलिंग जयपुर के सेंट जेवियर्स स्कूल से हुई है।

उल्लेखनीय है कि कोरोना वायरस से मौत का कारण उसका मानव के फेफड़ों में प्रवेश कर जाना है। उसे फेफडों से बाहर निकालना अभी तक चिकित्सा जगत के लिए टेढ़ी खीर रही है। डा. मयंक अग्रवाल ने ये जानते हुए भी कि वे फेफडों में दिक्कत से जूझ रहे हैं और कोरोना रोगियों का इलाज करते हुए उन्हें सबसे अधिक खतरा है।

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