कोरोना से अधमरी अर्थव्यवस्था के इलाज का मामला

नई दिल्ली. कोरोना के झटके से अधमरी अर्थव्यवस्था को ताकत देने के लिए प्रोत्साहन पैकेज घोषणाओं की नहीं बल्कि घोषित पैकेज का धन खर्च करने की जरूरत है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार रिजर्व बैंक के पूर्व गवर्नर विमल जालान का कहना है कि अर्थव्यवस्था को उबारने के लिए नया प्रोत्साहन पैकेज नहीं, पूर्व घोषित पैकेज की राशि खर्च करने की आवश्यकता है।

वित्तीय प्रोत्साहन पहले ही दिया जा चुका है। पहले जो घोषणा कर चुके हैं, उसे खर्च करने की जरूरत है। सरकार ने कोरोना वायरस महामारी से प्रभावित अर्थव्यवस्था को उबारने के लिए मई में 20 लाख करोड़ रुपये के आत्मनिर्भर भारत पैकेज की घोषणा की थी। पहले से घोषित संसाधन खर्च करने के बाद राजकोषीय घाटे को बढ़ाया जाना चाहिए। सरकार तीन चरणों में प्रोत्साहन पैकेजों की घोषणा कर चुकी है। कोविड-19 का आर्थिक गतिविधियों पर प्रतिकूल असर पड़ा है। उम्मीद है कि नौकरियों और वृद्धि में जो नुकसान हुआ है, उसकी भरपाई 2021 के अंत तक हो जाएगी। 2021-22 में अर्थव्यवस्था की स्थिति सुधरेगी। 2021-22 में वृद्धि दर 6 से 7 प्रतिशत रह सकती है।

उधर रिजर्व बैंक का अनुमान है कि चालू वित्त वर्ष में भारतीय अर्थव्यवस्था में 9.5 प्रतिशत की गिरावट आएगी। अंतरराष्ट्रीय मुद्राकोष (आईएमएफ) तथा विश्व बैंक का भारतीय अर्थव्यवस्था में 10.3 प्रतिशत और 9.6 प्रतिशत की गिरावट का अनुमान है।

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