नई दिल्ली. दुनिया के सबसे बड़े अमीर अमेज़ॉन के जेफ़ बेज़ोस और रिलायंस के मुकेश अंबानी के बीच किशोर बियानी और उनके फ़्यूचर ग्रुप के अधिग्रहण को लेकर ठन गई है। इस जंग में कौन जीतेगा, इस बारे में कुछ कहना मुश्किल है लेकिन कारोबार के जानकार मानते हैं कि मुकेश अंबानी को अमीरी के इस अखाड़े में चित्त करना काफी मुश्किल है क्योंकि वे अंतिम दम तक लड़ने में यकीन रखते हैं।

दुनिया के सामने आई लड़ाई

गत दिनों सिंगापुर के अंतर्राष्ट्रीय पंचाट सिंगापुर इंटरनेशल आर्बिट्रेशन सेंटर से जारी अंतरिम आदेश में फ़्यूचर ग्रुप के कारोबार को रिलायंस ग्रुप को बेचने पर रोक लगा दी। इसके साथ ही दो कारोबारी दिग्गजों के बीच चल रही जंग दुनिया के सामने आ गई। दोनों बिजनेस हैवीवेट किशोर बियानी के ब्रांड बिग बाज़ार ही नहीं पूरे रिटेल और होलसेल कारोबार अधिग्रहण करने को लेकर आमने-सामने हैं। किशोर बियानी काफ़ी समय से दुनिया के किसी बड़े रिटेलर से हाथ मिलाने की कोशिश में भी थे। दूसरे शब्दों में कहा जा सकता है कि दुनिया के सारे बड़े रिटेलर्स की नज़र फ़्यूचर ग्रुप पर थी, क्योंकि वह भारत की सबसे बड़ी रिटेल कंपनी है।

सबसे बड़ा रिटेल बाजार

वैसे भी वर्ल्ड इकोनॉमिक फ़ोरम का अनुमान है कि 2030 तक भारत, अमरीका और चीन के बाद दुनिया का सबसे बड़ा रिटेल बाज़ार होगा। इस साल देश के रिटेल कारोबार का आकार क़रीब 70 हज़ार करोड़ डॉलर है, जिसके 10 साल में बढ़कर क़रीब 1.3 लाख डॉलर हो जाने की उम्मीद है। इस बीच अमेज़ॉन ने 2019 के अगस्त में फ़्यूचर ग्रुप की कंपनी फ़्यूचर कूपन्स लिमिटेड में 49 प्रतिशत हिस्सेदारी ख़रीद ली। इससे अमेज़ॉन को यह अधिकार मिल जाता है कि वो फ़्यूचर रिटेल लिमिटेड में प्रोमोटर की पूरी या कुछ हिस्सेदारी ख़रीद सकता है। जब यह करार हुआ था, फ़्यूचर ग्रुप उस वक्त फ़ूड हॉल, फ़ैशन एट बिग बाज़ार और अपने पुराने ब्रांड बिग बाज़ार को बढ़ाने की कोशिश में लगा था।

मुसीबत बनकर टूटा लॉकडाउन

इसी दौरान गत मार्च में लॉकडाउन मुसीबत बनकर फ्यूचर ग्रुप पर टूट पड़ा। किशोर बियानी ने कहा कि देशबंदी के बाद सारे स्टोर बंद हो गए और तीन-चार महीनों में ही कंपनी को सात हज़ार करोड़ रुपये का नुक़सान झेलना पड़ा। यहां बड़ा सवाल है कि आख़िर मुकेश अंबानी और जेफ़ बेज़ोस आमने-सामने क्यों आए? जवाब है कि दोनों को दुनिया का सबसे बेहतरीन बिग बाज़ार दिख रहा है और वे उसे अपनी झोली में डालना चाहते हैं। भारत में साढ़े छह अरब डॉलर लगाने की योजना बनाकर बैठे अमेज़ॉन को सबसे बड़ी चुनौती रिलायंस दिख रही है। उसके पास ना सिर्फ़ सबसे बड़ा रिटेल नेटवर्क है, बल्कि जियोमार्ट जैसा ऑनलाइन पोर्टल भी है और रिलायंस जियो जैसे ज़बरदस्त नेटवर्क का साथ भी। यही वजह है कि वो इस सौदे को रुकवाने के लिए ज़ोर लगा रहा है।

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