थलसेनाध्यक्ष ने साफगोई से किया स्वीकार

नई दिल्ली. थलसेनाध्यक्ष एमएम नरवणे ने ने स्वीकार किया है कि वास्तविक नियंत्रण रेखा पर चीनी सैनिक हर साल ट्रेनिंग के लिए आते थे। इसलिए भारतीय सेना ने उसे रूटीन समझ लिया, लेकिन चीनी सैनिक आगे बढ़ आए जिसका उसे वैसा ही फायदा मिला, जैसा अगस्त में भारतीय सेना के कैलाश रेंज पर कब्जा करने पर मिला। उन्होंने चीनी सेना के दस हजार जवान पीछे हटाने को सालाना गतितिधि करार दिया है। आर्मी चीफ का कहना है कि चीन के सैनिक ट्रेनिंग एरिया में थे। ट्रेनिंग पूरी होने के बाद वे अपने गैरिसन में वापस चले गए। लेकिन गतिरोध के पॉइंट पर न चीन के सैनिक कम हुए हैं ना ही हमारे। एलएसी पर हालत में कोई बदलाव नहीं है।

सेना दिवस से पहले आयोजित सालाना प्रेस कॉन्‍फ्रेंस में आर्मी चीफ एमएम नरवणे ने देश के सामने रक्षा चुनौतियों का जिक्र किया साथ ही देश को भरोसा दिलाया कि भारतीय सेनाएं हर हाल में मुंहतोड़ जवाब देने में समर्थ हैं। नरवणे ने पाकिस्‍तान और चीन को साझा खतरा बताया है। ये एक ऐसी हकीकत है जिसे अनदेखा नहीं किया जा सकता। सेना किसी भी चुनौती का सामना करने के लिए तैयार है।

पाकिस्‍तान और चीन दोनों मिलकर हमारे लिए बड़ा जोखिम पैदा करते हैं। पाकिस्‍तान लगातार आतंकवाद को गले लगाए हुए है। आतंक के खिलाफ हमारी जीरो टॉलरेंस नीति है। हमारे पास अधिकार है कि अपने चुने हुए समय और स्‍थान पर सटीक पलटवार करें। हम यह संदेश दे चुके हैं।

सेना में नई तकनीक के इस्‍तेमाल पर जनरल नरवणे ने कहा कि भविष्‍य की चुनौतियों का सामना करने के लिए एक विस्‍तृत योजना तैयार की गई है ताकि सभी तकनीकों का इस्‍तेमाल करके आधुनिक तकनीक से सुसज्जित सेना बनाई जा सके। एलएसी पर चीन की तरफ से मोबलाइजेशन नया नहीं था, वह हर साल ट्रेनिंग के लिए आते हैं। हमारी नजर भी थी। पर वह ऐसा करेंगे ऐसा अंदाजा नहीं लगाया जा सकता था। फर्स्ट मूवर एडवांटेज उन्हें मिला। जैसा हमें अगस्त में मिला और हमने उन्हें सरप्राइज किया। नरवणे का कहना है कि आर्मी एविएशन में अब तक महिला ऑफिसर सिर्फ ग्राउंड ड्यूटी पर ही थी पर अब इस साल जुलाई से जब कोर्स शुरू होगा तब महिलाएं फ्लाईंग विंग में भी शामिल होगी। एक साल बाद आर्मी एविएशन में महिला फाइटर पायलट होंगी।

सेना के जवानों और अफसरों में मानसिक तनाव बढ़ने की खबरों पर आर्मी चीफ ने कहा सैनिकों में सूसाइड का आंकड़ा हर साल घट रहा है। यह गलत है कि हर साल 100 या ज्यादा सैनिक सूइसाइड कर रहे हैं। सेना प्रमुख ने कहा कि कश्मीर में हालत सुधरे हैं लेकिन अभी भी हालात ऐसे नहीं है कि आर्मी को हटाया जाए। नॉर्थ ईस्ट से आर्मी की एक ब्रिगेड हटाई गई है।

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