केबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी ने दी 83 तेजस खरीदने के सौदे को मंजूरी

नई दिल्ली. भारत की केबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी ने उन तेजस विमानों के खरीद समझौते को मंजूरी दे दी है जिसे पलक झपकते ही हमला करने के लिए तैयार किया गया है। चौथी पीढ़ी के सुपरसोनिक लड़ाकू विमान तेजस की गिनती दुनिया के सबसे हल्के और छोटे लेकिन बेहद घातक विमानों में की जाती है। तेजस दुश्मन की सीमा में गहराई तक घुसकर जमीन और आसमान में मिसाइली हमले कर सकता है।

2222 किलोमीटर की रफ्तार

आकाशीय डॉग फाइट में उसकी फुर्ती देखने लायक होती है। माउंट एवरेस्ट से दोगुनी ऊंचाई तक 2222 किलोमीटर की रफ्तार से उड़ने में सक्षम तेजस छह तरह की मिसाइलें दागने में सक्षम है। दुश्मन को आसानी से चकमा देने की इसकी दक्षता पर लड़ाकू वैमानिकी विशेषज्ञ कई बार दांतों तले उंगली दबा चुके हैं। उल्लेखनीय है कि माउंट एवरेस्ट की उंचाई 8848.9536 मीटर है और ये विमान 16459.2 मीटर की ऊंचाई तक उड़ सकता है।

सिंगल सीटर है स्वदेशी तेजस

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली कैबि‍नेट कमेटी ऑफ सिक्‍योरिटी ने 83 हल्‍के लड़ाकू विमान तेजस की खरीद के 48,000 करोड़ रुपए के स्वदेशी रक्षा खरीद सौदे को मंजूरी दे दी है। माना जा रहा है कि सरकार के इस कदम से भारतीय वायुसेना और मजबूत होगी। स्वदेशी फाइटर जेट एलसीए तेजस के सबसे बड़े सौदे को मंजूरी दिया जाना भारतीय रक्षा विनिर्माण में आत्मनिर्भरता को नए आयाम प्रदान करेगा। हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स बैंगलूरू में बनाया गया एलसीए तेजस पूरी तरह स्वदेशी है। लड़ाकू तेजस सिंगल सीटर और ट्रेनी तेजस 2 सीटर है।

विमानों की आकाशीय लड़ाई में कायम करता है बढ़त

हवा से हवा और हवा से जमीन पर मिसाइल दागने की क्षमता वाला तेजस इजरायली मल्टी मोड रडार सिस्टम से लैस है। हमले के लिए निकलते वक्त वह 13500 किलोग्राम वजन ले जा सकता है। 43.5 फीट लंबे और 14.9 फीट ऊंचा तेजस बेहद हल्का है। इससे विमानों की आकाशीय लड़ाई में उसे बढ़त हासिल करने में आसानी रहती है।

बनेगा मिग 21 का विकल्प

इसका हमलावर सिस्टम हवा से हवा में मार करने वाली छह तरह की मिसाइलों को दाग सकता है। इनमें डर्बी, पाइथन-5, आर-73, अस्त्र, असराम, मेटियोर, हवा से जमीन पर मार करने वाली मिसाइलें ब्रह्मोस एनजी, एंटी रेडिएशन मिसाइल और ब्रह्मोस-एंटीशिप मिसाइल शामिल हैं। तेजस में लेजर गाइडेड बम, गाइडड बम और क्लस्टर हथियार भी लगाए जा सकते हैं। तेजस को मिग-21 के विकल्प के रूप में वायुसेना में शामिल किया जा रहा है। तेजस ने 4 जनवरी 2001 को पहली परीक्षण उड़ान भरी थी।

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