नई दिल्ली. शरीयत को लेकर पूरी दुनिया के निशाने पर रहने वाले मुस्लिम समुदाय के दो धड़े भारत में बाबरी मस्जिद के स्थान पर बनने वाली मस्जिद निर्माण को लेकर भिड़ गए हैं। इस भिड़ंत में एक तरफ सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड है जो अयोध्या के धन्नीपुर गांव में मस्जिद निर्माण से जुड़ा हुआ है तो दूसरी ओर अखिल भारतीय मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड है जो प्रस्तावित मस्जिद निर्माण को शरीया और वक्फ कानून के खिलाफ बता रहा है।

अखिल भारतीय मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (एआईएमपीएलबी) के सदस्य जफरयाब जिलानी का कहना है कि उच्चतम न्यायालय के फैसले के बाद अयोध्या में प्रस्तावित मस्जिद वक्फ कानून के खिलाफ और शरीया कानून के अनुसार अवैध है। बाबरी मस्जिद एक्शन कमेटी के संयोजक रहे जिलानी के अनुसार वक्फ कानून के अनुसार मस्जिद अथवा मस्जिद की जमीन की अदला बदली नहीं हो सकती।

इस वजह से अयोध्या में प्रस्तावित मस्जिद वक्फ और शरीया कानून के मुताबिक नहीं है। जबकि सुन्नी वक्फ बोर्ड अध्यक्ष जुफार फारूकी ने एक समाचार एजेंसी को बताया कि ये भूमि के टुकड़े की अदला बदली नहीं है। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट फैसले के अनुपालन में धन्नीपुर गांव की जमीन उत्तर प्रदेश सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड को आवंटित की गई है और बोर्ड ने इसके लिये नौ लाख 29 हजार 400 रुपये स्टाम्प ड्यूटी चुकायी है। अब यह संपत्ति वक्फ बोर्ड की है।

मस्जिद निर्माण के लिए बने ट्रस्ट के सचिव अतहर हुसैन ने जिलानी के आरोपों को शरीया कानून की अलग तरह से की गई व्याख्या करार दिया है। शरीया कानून की व्याख्या करने की शक्ति कुछ लोगों के हाथों में केन्द्रित नहीं है। हुसैन का सवाल है कि मस्जिद नमाज अदा करने की जगह है इसलिये मस्जिद निर्माण में गलत क्या है। हुसैन ने जिलानी पर गलत सूचना फैलाने का आरोप भी लगाया है।

वैसे जिलानी अधिवक्ता हैं, इसलिए अगर सेंट्रल वक्फ कानून का उल्लंघन किया जा रहा है तो वे इसे किसी अदालत में चुनौती क्यों नहीं देते हैं! इससे पहले अखिल भारतीय मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के एक अन्य कार्यकारी सदस्य एस क्यू आर इलियास वक्फ बोर्ड पर सरकार के दबाव में काम करने का आरोप लगा चुके हैं।

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