नई दिल्ली. सुप्रीम कोर्ट ने केन्द्र की नरेन्द्र मोदी सरकार को तगड़ा झटका देते हुए तीन नए कृषि कानूनों पर रोक लगा दी। इसके साथ ही उसने चार कृषि विशेषज्ञों की समिति गठित कर समस्या का हल ढूंढने को कहा है। उधर किसानों ने कमेटी को मंजूर करने से इनकार कर दिया है।

जनता के जीवन और सम्पत्ति की सुरक्षा की चिंता

उच्चतम न्यायालय ने मंगलवार को कहा कि कोई ताकत उसे नए कृषि कानूनों पर जारी गतिरोध को समाप्त करने के लिए समिति का गठन करने से नहीं रोक सकती तथा उसे समस्या का समाधान करने के लिए कानून को निलंबित करने का अधिकार है। कोर्ट ने उसने किसानों के प्रदर्शन पर कहा कि हम जनता के जीवन और सम्पत्ति की रक्षा को लेकर चिंतित हैं।

समाधान चाहने वाले जाएंगे समिति के पास

तीन जजों की पीठ ने किसान संगठनों से सहयोग मांगते हुए कहा कि कृषि कानूनों पर जो लोग सही में समाधान चाहते हैं, वे समिति के पास जाएंगे। उसने कहा कि यह राजनीति नहीं है। राजनीति और न्यायतंत्र में फर्क है और आपको सहयोग करना ही होगा।

समिति गठन से नहीं रोक सकती कोई भी ताकत

प्रधान न्यायाधीश एस. ए. बोबडे, न्यायमूर्ति ए. एस. बोपन्ना और न्यायमूर्ति वी. रामासुब्रमणियन की पीठ ने सोमवार को इस मामले की सुनवाई के दौरान अपनी नाराजगी व्यक्त करते हुये यहां तक संकेत दिया था कि अगर सरकार इन कानूनों का अमल स्थगित नहीं करती है तो वह उन पर रोक लगा सकती है। न्यायालय ने कहा कि कोई ताकत हमें नए कृषि कानूनों पर जारी गतिरोध को समाप्त करने के लिए समिति का गठन करने से नहीं रोक सकती तथा हमें समस्या का समाधान करने के लिए कानून को निलंबित करने का अधिकार है।

सरकार की नीति और नीयत जैसी है कमेटी

उधर किसान नेताओं ने प्रेस कॉन्फ्रेंस करके कहा कि 26 जनवरी को हमारा आंदोलन ऐतिहासिक होने जा रहा है। हम क़ानून रद्द करवाने को लेकर आंदोलन कर रहे हैं। किसानों का कहना है कि सरकार की नीति और नीयत जैसी रही है, वहीं इस कमेटी के भी मामले में देखने को मिल रही है। कमेटी के चारों सदस्यों की दलील सरकारों के पक्ष में रही है। उन्होंने कहा कि हमारी लड़ाई सरकार से है ना कि किसी कमेटी से है। हम लोहड़ी में अब भी तीन कृषि क़ानूनों को जलाने जा रहे हैं। 26 जनवरी का प्रदर्शन पूरी तरह से शांतिपूर्ण होगा।

समिति के चारों सदस्यों को माना जाता है नए कानूनों का समर्थक

सुप्रीम कोर्ट की कमेटी में भारतीय किसान यूनियन के भूपिंदर सिंह मान, शेतकारी संगठन के अनिल घनवंत, कृषि अर्थशास्त्री अशोक गुलाटी और अंतर्राष्ट्रीय खाद्य नीति अनुसंधान संस्थान के प्रमोद के. जोशी शामिल हैं। चारों को नए कृषि कानूनों का समर्थक माना जाता है।

आंदोलनकारी किसानों का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट की चार सदस्यीय कमेटी में शामिल भारतीय किसान यूनियन के नेता भूपिंदर सिंह मान कृषि कानूनों का समर्थन कर चुके हैं। शेतकारी संगठन के अनिल घनवंत भी कह चुके हैं कि इन कानूनों को वापस लेने की आवश्यकता नहीं है।

गुलाटी और जोशी कर चुके हैं समर्थन

कमेटी में शामिल किए गए कृषि अर्थशास्त्री अशोक गुलाटी भी तीनों कृषि कानूनों के पक्ष में रहे हैं। अशोक गुलाटी ने टाइम्स ऑफ इंडिया को दिए एक इंटरव्यू में कहा था कि तीनों कानून से किसानों को फायदा होगा, लेकिन सरकार यह बताने में कामयाब नहीं रही। चौथे सदस्य अंतर्राष्ट्रीय खाद्य नीति अनुसंधान संस्थान के प्रमोद के. जोशी हाल में ट्वीट करके कह चुके हैं कि हमें एमएसपी से परे नई मूल्य नीति पर विचार करने की आवश्यकता है

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