नई दिल्ली. वे सामान्य रूप से घर के काम कर रहे थे कि अचानक उन्हें उल्टियां हुईं और फिर बेहोश हो गए। कोरोना काल में इन लक्षणों वाले 556 मरीजों ने आंध्र प्रदेश सरकार के होश उड़ा दिए हैं। हालांकि प्रदेश के मुख्यमंत्री ने दावा किया है कि दिल्ली स्थित एम्स द्वारा की गई प्राथमिक जांच में मरीजों के खून सैम्पल में सीसा और निकल मिले हैं। इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ केमिकल टेक्नोलॉजी और दूसरे संस्थान में जांच चल रही है और उम्मीद है कि नतीजे जल्द आएंगे।

असल में पिछले सप्ताह उल्टी और बेहोशी के लक्षणों वाले 556 मरीजों को अस्पतालों में भर्ती कराना पड़ा। इनमें से 458 को अस्पतालों से छुट्टी दी जा चुकी है। 98 मरीजों की अभी जांच जारी है। इनमें 12 साल से कम उम्र के 45 बच्चे हैं। चिकित्सकों का कहना है कि दौरे पड़ना और बेहोश होना सभी मरीजों में सिर्फ एक बार देखा गया। परिवार में सिर्फ एक ही व्यक्ति में ये लक्षण दिखे। इसका मतलब है कि यह बीमारी एक से दूसरे तक नहीं फैलती है।

उधर विश्व स्वास्थ्य संगठन पानी के साथ-साथ दूध और चावल के सैंपलों की जांच करा रहा है। जहां ये रहस्यमय बीमारी फैली है, उस आंध्र प्रदेश के एलुरु में इस बीमारी के लिए कुछ जानकार कीटनाशकों के प्रदूषण की संभावना बता रहे हैं। उल्लेखनीय है कि कोविड-19 संक्रमण के मामलों में आंध्र प्रदेश सबसे ज्यादा प्रभावित राज्यों में से है, लेकिन इस बीमारी के लक्षण कोविड के लक्षणों जैसे नहीं हैं। बीमारी के सभी पीड़ितों का कोविड टेस्ट हो चुका है और किसी को भी संक्रमित नहीं पाया गया है।

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