नई दिल्ली. भारत में स्टार्ट-अप के जरिए कॅरियर बना रहे युवाओं के लिए 2021 की सबसे बड़ी खुशखबरी। केन्द्र सरकार उन्हें पूंजी ​जुटाने के लिए शेयर बाजार में जाने की इजाजत देने पर विचार कर रही है। इससे युवाओं को अपने स्टार्टअप के लिए पूंजी की तंगी का सामना नहीं करना पड़ेगा।
सरकार स्टार्ट-अप के लिये इक्विटी पूंजी जुटाने में मदद के वास्ते फंड ऑफ फंड योजना अमल में ला रही है। सरकार स्टार्ट-अप को ऋण पूंजी जुटाने में भी मदद करेगी।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 1,000 करोड़ रुपये के ‘स्टार्ट-अप इंडिया सीड फंड’ शुरू किए जाने की जानकारी देने के साथ ही इस आशय के संकेत दिए। प्रारम्भ: स्टार्ट-अप भारत अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन’ को संबोधित करते हुये प्रधानमंत्री ने कहा कि नये उद्यमियों को शुरुआती पूंजी उपलब्ध कराने के लिये देश 1,000 करोड़ रुपये के ‘स्टार्ट-अप इंडिया सीड फंड’ की शुरुआत कर रहा है। ये सम्मेलन देश में स्टार्ट-अप इंडिया अभियान के पांच साल पूरे होने के अवसर पर आयोजित किया गया। 2016 में इसी दिन इस अभियान की शुरुआत हुई थी।

भारत आज स्टार्ट-अप के मामले में दुनिया का तीसरा बड़ा देश है। इस दौरान कई उभरते उद्यमियों को आगे बढ़ने में मदद की गई। नवोन्मेषी प्रौद्योगिकी के साथ ये उद्यमी आगे बढ़े और बड़ी कंपनी बन सके। भारत में स्टार्ट-अप अब केवल बड़े शहरों तक ही सीमित नहीं है बल्कि नये उभरते 40 प्रतिशत स्टार्ट-अप देश के दूसरी और तीसरी श्रेणी के शहरों से सामने आ रहे हैं।

2014 में केवल चार स्टार्ट-अप ही यूनिकॉर्न क्लब में थे लेकिन अब 30 से अधिक भारतीय स्टार्ट-अप यूनिकॉर्न क्लब के सदस्य हैं। 2020 में ही 11 भारतीय स्टार्ट-अप यूनिकॉर्न क्लब में शामिल हुए हैं। भारत स्टार्ट-अप वाला तीसरा बड़ा देश बन गया है। देश में इस समय 41,000 से अधिक स्टार्ट-अप काम कर रहे हैं। ज्यादातर स्टार्ट-अप ऐसे है जिनमें महिलायें मुख्य भूमिका में हैं। कोरोना महामारी के दौरान कई स्टार्ट-अप शुरू हुए।

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