प्रदूषण मापक परीक्षणों में हेराफेरी का मामला

नई दिल्ली.सुप्रीम कोर्ट ने जर्मन कार विनिर्माता स्कोडा ऑटो फॉक्सवैगन इंडिया की उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें उसकी डीजल कार में कथित रूप से ‘धोखा देने वाले उपकरण’ के इस्तेमाल पर उत्तर प्रदेश में दर्ज एफआईआर को चुनौती दी गई थी। मुख्य न्यायाधीश एस ए बोबडे और न्यायमूर्ति ए एस बोपन्ना और न्यायमूर्ति वी रामसुब्रमण्यन की पीठ ने यह फैसला सुनाया और याचिका को खारिज कर दिया।
स्कोडा पर आरोप है कि प्रदूषण उत्सर्जन परीक्षणों में हेरफेर करने के लिए सॉफ्टवेयर आधारित धोखा देने वाले उपकरण का इस्तेमाल किया गया। ऐसा ही आरोप कुछ साल पहले फॉक्सवैगन पर लगा था।
ऑटोमोबाइल विनिर्माता की दलील थी कि इस मामले में दिसंबर 2015 में एनजीटी में शिकायत की गई थी। मार्च 2019 में उस पर जुर्माना लगाया गया, जिसे शीर्ष न्यायालय ने रोक दिया था। उत्तर प्रदेश में भी दर्ज प्राथमिकी रद्द कराने के लिए कंपनी इलाहाबाद हाईकोर्ट का दरवाजा भी खटखटा चुकी है। हाईकोर्ट ने एफआईआर रद्द करने से इनकार कर याचिका खारिज कर दी थी।
कंपनी ने अपने खिलाफ उत्तर प्रदेश में एक कार खरीददार की ओर से दर्ज कराई गई एफआईआर को चुनौती दी थी। खरीददार ने कंपनी की डीजल कार में उत्सर्जन स्तर छिपाने के लिये धोखाधड़ी वाले उपकरण के उपयोग के आरोप में एफआईआर दर्ज कराई थी।
न्यायालय ने कहा कि आपराधिक जांच से निपटने को लेकर कई रास्ते हैं। स्कोडा की ओर से अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा था कि मामला एनजीटी और शीर्ष अदालत देख रही है, ऐसे में नया मामला कैसे शुरू किया जा सकता है। शीर्ष अदालत ने कहा कि दोनों अलग-अलग मामले हैं। इससे पहले इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा था कि वाहन धोखाधड़ी वाले उपकरण का उपयोग हुआ हो या नहीं, यह जांच का विषय है।

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