नई दिल्ली। दिल्ली अल्पसंख्यक आयोग में आज  अल्लामा इकबाल के जन्म दिवस के उपलक्ष में एक संगोष्ठी का आयोजन किया गया।इस कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रोफ़ेसर अब्दुल हक ने की एवं मुख्य अतिथि के तौर पर  दिल्ली सरकार के पूर्व मंत्री और विधायक  सोमनाथ भारती, आयोग के अध्यक्ष जाकिर खान ने भाग लिया। कार्यक्रम का आयोजन मरकज इकबाल इंडिया दिल्ली और दिल्ली अल्पसंख्यक आयोग के संयुक्त  तत्वधान में किया गया। इस मौके पर अतिथि के तौर पर डॉ सैयद अहमद खान, डॉक्टर हबीबुल्लाह,  डॉक्टर अरशद ग्यास,  आदि ने भाग लिया।

उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए सोमनाथ भारती ने कहा कि  डॉ सर मोहम्मद इकबाल की महानता इस बात से जाहिर होती है कि जब भारत से एक अंतरिक्ष मिशन चांद पर गया था  तो उनसे पूछा गया कि भारत वहां से कैसा दिखता है तो उन्होंने कहा था कि सारे जहां से अच्छा हिंदुस्ता हमारा। उन्होंने कहा कि इन पंक्तियों ने भारत की तमाम महानताओं को आपस में  समेट दिया है।उनका कहना है कि कोई भी धर्म या धार्मिक ग्रंथ  कभी भी बांटने की बात नहीं करते हैं।सभी धार्मिक ग्रंथों में  आपस में प्यार मोहब्बत मेलजोल और भाईचारे का ही संदेश दिया गया है।इसलिए हमें  अपने धर्मों के बारे में  जानकारी हासिल करनी चाहिए और अपने धार्मिक ग्रंथों को पढ़ना चाहिए। जब हम ऐसा करेंगे तो हमारे देश में भाईचारा एकता, मेलजोल बढ़ेगा आपस में प्यार मोहब्बत बढ़ेगी।  इकबाल ने भी यही संदेश अपने नगमों और नज़्मों के माध्यम से देने का प्रयास किया था।

उन्होंने कहा कि अभी हाल में कुछ लोगों के जरिए यह कहा जा रहा है कि इकबाल  पाकिस्तान चले गए थे यह पूरी तरह भ्रामक है और झूठा आरोप है क्योंकि इकबाल 1938 में ही  इस दुनिया को छोड़ कर चले गए थे। उस समय पाकिस्तान भी भारत में ही था और  हमारे देश का बंटवारा नहीं हुआ था।  इम मौके पर प्रोफेसर अब्दुल हक ने कहा कि इकबाल की महानता की  जहां बात हो रही है तो मैं बताना चाहता हूं कि भारत में  उनके ऊपर अब तक 2000 से अधिक  लोगों ने पीएचडी की है।रूस में 300 लोगों ने उनके ऊपर पीएचडी की है।

इस मौके पर दिल्ली अल्पसंख्यक आयोग के चेयरमैन  जाकिर खान ने कहा कि अल्लामा इकबाल को जानने और समझने की जरूरत है। वह एक महान स्वतंत्रता संग्राम सेनानी थे और उन्हीं के नज़्मों ने ही भारत में स्वतंत्रता संग्राम आंदोलन को  आगे बढ़ाया लोगों में जोश और जज्बा भरा था।  इस मौके पर डॉ सैयद अहमद खान  ने कहा कि हमें इकबाल के जीवन को समझने की जरूरत है। इकबाल ने अपना पूरा जीवन राष्ट्र प्रेम में व्यतीत कर दिया ना। उनके  जरिए कहे गए नगमो और नज़्मों में राष्ट्रप्रेम की भावना कूट-कूट कर भरी हुई थी। संगोष्ठी में नेता जफर अहमद,शमीम अहमद खान,  शफी देहलवी,आरिफ इकबाल,फहीम अहमद अलीग, हकीम मुर्तजा देहलवी, आदि ने भी अपने विचार व्यक्त किए। इस मौके पर डॉ सैयद अहमद खान के जरिए मौलवी इस्माइल मेरठी पर लिखी गई पुस्तक का विमोचन भी किया गया। मंच का संचालन हकीम अताउलर्रहमान अजमल जी ने किया।

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