दस प्रतिशत में खत्म किया जा रहा है एनपीए

जयपुर. स्टेट बैंक आफ इंडिया की ऋण समाधान स्कीम बैंक प्रबंधकों के लिए दुधारू गाय बन गई है। वे एनपीए समाप्त करने के लिए लाई गई इस स्कीम की आड में उन छोटे ऋणियों को लूट रहे हैं जिनके ऋण एनपीए के दायरे में आ गए हैं। बैंक प्रबंधक विशेषकर ग्रामीण क्षेत्र की शाखाओं के प्रबंधक इसके लिए दलालों का सहारा लेकर ऋणियों से अधिक राशि वसूल कर बैंकों को नुकसान पहुंचा रहे हैं।

दस प्रतिशत देकर हो सकते हैं ऋण मुक्त

बैंकिंग सेक्टर के एक सूत्र के अनुसार एसबीआई ने 31 दिसम्बर 2019 की कट आफ रखकर किसानों के तीन लाख तक, चार लाख तक के एजुकेशन लोन और दस लाख तक के एसएमई लोन के एनपीए एकाउंटों को समाप्त करने की स्कीम लॉंच की है। इसके लिए एनपीए हो चुके खाताधारक को दस से बीस फीसदी राशि जमा करवाकर अपने ऋण से मुक्त होने का मौका दिया गया है। लेकिन ग्रामीण क्षेत्र के बैंकों के प्रबंधक एनपीए घोषित कर दिए गए खाताधारकों से अधिक राशि वसूल कर तय राशि जमा कर रहे हैं और शेष को अपनी जेब में रख रहे हैं।

तीस प्रतिशत तक वसूल रहे हैं प्रबंधक

एसबीआई प्रबंधन को हाल ही दौसा जिले की मंडावरी शाखा के ऐसे ही एक एनपीए खाताधारक की शिकायत मिली है। शिकायत करने वाले किसान की ओर से कहा गया है कि उसके तीन लाख रूपए के ऋण खाता एनपीए के दायरे में आने के बावजूद शाखा प्रबंधक ने उससे दस फीसदी की अपेक्षा तीस प्रतिशत राशि वसूल ली। जबकि नियमानुसार उसे सिर्फ दस फीसदी राशि ही जमा करवानी थी। किसान का आरोप है कि ऐसे अनेक खाताधारकों से अधिक ​राशि की वसूली की गई है और प्रबंधन के हौंसले इतने बढ़े हुए हैं कि वह लगातार इसी तरह से अवैध वसूली कर रहा है।

दौसा जिले में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार

किसान का दावा है कि अगर जांच की जाए तो अकेले मंडावरी शाखा में ही पचास लाख से अधिक की गडबडी इसी तरह की जा चुकी है। एसबीआई सूत्रों का कहना है कि ऋण समाधान योजना में गडबड़ी की शिकायतें लगातार मिल रही हैं और बैंक सतर्कता शाखा की इस पर नजर भी है। माना जा रहा है कि ऋण समाधान स्कीम के जरिए बैंक अधिकारी और कर्मचारी पूरे राजस्थान में मोटी राशि का हेरफेर कर चुके हैं।

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