नई दिल्ली. ग्रामीण भारत का विश्वास है कि जलाऊ लकड़ी का उपयोग परिवार की सेहत के लिए एलपीजी से बेहतर है। खाना पकाने वाले स्वच्छ ईंधन एलपीजी की उपलब्धता के बावजूद ग्रामीण भारत में जलावन का उपयोग बड़े पैमाने पर किया जाता है। हालांकि जलाऊ लकड़ी से खाना पकाने वाले जानते हैं कि इससे स्वास्थ्य समस्याएं होती हैं। वे मानते हैं कि एलपीजी के उपयोग से खाना पकाने की तुलना में ये सेहतमंद है।

हर घर तक स्वच्छ ईंधन पहुंचाना है लक्ष्य

भारत में लोग खाना पकाने के लिए ठोस ईंधन पर अधिक निर्भर हैं। संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्यों में शामिल स्वच्छ ईंधन से खाना पकाने के लिए सार्वभौमिक पहुंच प्रदान करने के समझौते पर हस्ताक्षर करके हर घर तक स्वच्छ ईंधन की पहुंच सुनिश्चित के लिए भारत भी वचनबद्ध है।

जलाऊ लकड़ी से बिक्री से होने वाली आय है बड़ा कारण

हाल ही अनुसंधानकर्ताओं के एक दल ने आंध्र प्रदेश के चित्तूर जिले के जलाऊ लकड़ी का उपयोग करने वाले चार गांवों में महिलाओं की राय जानी थी। उपयोगकर्ताओं का मानना था कि इस ईंधन से खाना पकाने से उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार हुआ है क्योंकि जलाऊ लकड़ी की बिक्री से आय होती है।

एलपीजी को मानते हैं आर्थिक बोझ

जबकि ईंधन इकट्ठा करने से उन्हें आपस मे मेल-जोल बढ़ाने का अवसर मिलता है। वे एलपीजी को एक आर्थिक बोझ के रूप में देखने के साथ ही मानते हैं कि उससे बना भोजन का स्वाद अच्छा नहीं होता। जलाऊ लकड़ी उपयोगकर्ताओं के अनुसार जलाऊ लकड़ी पर खाना बनाने से स्वाद बेहतर होता है।

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