हनुमान बेनीवाल ने छुड़ाया कुनबे से पीछा

नई दिल्ली. राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी का दावा है कि वह एनडीए से फेविकोल से चिपकी हुई नहीं है। इसलिए किसानों के मुद्दे पर उसने एक झटके में उसका साथ छोड़ दिया है। कृषि कानूनों के विरोध में अकाली दल के बाद ;आरएलपीद्ध ने भी एनडीए से अपना पीछा छुडा लिया है। पार्टी के संयोजक और राजस्थान के नागौर से सांसद हनुमान बेनीबाल ने इससे पहले किसान आंदोलन का समर्थन करते हुए तीन संसदीय समितियों से इस्तीफा दे दिया था।

अलवर जिले के शाहजहांपुर में बेनीवाल ने कहा कि वे राजग के साथ ’फेविकोल’ से चिपके हुए नहीं हैं। इसलिए वे खुद को राजग से अलग कर रहे हैं। बेनीवाल ने विवादास्पद कृषि कानूनों के विरोध में दिल्ली कूच का ऐलान किया है। आरएलपी प्रमुख बेनीवाल ने एनडीए से अलग होने के बाद कहा कि वे कांग्रेस से गठबंधन नहीं करेंगे। उन्होंने कृषि कानूनों के विरोध में एनडीए छोड़ा है। ये कानून किसान विरोधी हैं।

कृषि क्षेत्र में व्यापक बदलाव के लिए केंद्र सरकार की ओर से लाए गए तीन कानूनों के खिलाफ दिल्ली में किसानों का आंदोलन 31 दिनों से चल रहा है। इससे पहले एनडीए के सबसे पुराने सहयोगी अकाली दल ने भी कृषि आंदोलन के समर्थन में ही एनडीए से नाता तोड़ लिया था। कई और छोटे दल भी बीजेपी पर दबाव बढ़ाने में जुटे हुए हैं।

हालांकि एक लोकसभा सदस्य वाली आरएलपी के जाने से एनडीए की सेहत पर कोई असर नहीं पड़ेगा लेकिन राजस्थान के शेखावाटी और मारवाड के जाट किसानों में बेनीबाल की खासी पैठ है और इसके चलते भाजपा के समक्ष इन इलाकों में अपना आधार गंवाने का खतरा उत्पन्न हो गया है।

Leave a comment

Your email address will not be published.