नई दिल्ली. भाजपा के गुजरात से चुने गए सांसद मनसुख वसावा ने पार्टी की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने नर्मदा जिले के 121 गांवों को पर्यावरण के लिहाज से संवेदनशील घोषित किए जाने के विरोध में पार्टी छोड़ी है। वसावा जनजातीय मामलों पर मुखर रहते हैं। वे संसद के बजट सत्र के बाद लोकसभा से भी इस्तीफा दे देंगे।

वसावा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पिछले सप्ताह पत्र लिखकर मांग की थी कि पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की नर्मदा जिले के 121 गांवों को पर्यावरण के लिहाज से संवेदनशील क्षेत्र घोषित करने संबंधी अधिसूचना वापस ली जाए।

भरूच से छह बार सांसद रहे वसावा ने गुजरात भाजपा अध्यक्ष आर सी पाटिल को लिखे पत्र में कहा कि वे इस्तीफा दे रहे हैं। ताकि उनकी गलतियों के कारण पार्टी की छवि खराब न हो। वे पार्टी के वफादार कार्यकर्ता रहे हैं, इसलिए कृपया उन्हें माफ कर दिया जाए।

वसावा ने पाटिल को लिखे पत्र में कहा कि वह संसद के बजट सत्र के दौरान लोकसभा अध्यक्ष से मुलाकात के बाद भरूच से सांसद के तौर पर इस्तीफा दे देंगे। वसावा ने कहा कि उन्होंने पार्टी का वफादार बने रहने और पार्टी के मूल्यों को अपने जीवन में आत्मसात करने की पूरी कोशिश की।

उन्होंने कहा कि मैं अंतत: एक मनुष्य हूं और मनुष्य गलतियां कर देता है। पार्टी को मेरी गलतियों के कारण नुकसान नहीं हो, यह सुनिश्चित करने के लिए मैं पार्टी से इस्तीफा दे रहा हूं और पार्टी से माफी मांगता हूं। भाजपा प्रवक्ता भरत पंड्या के अनुसार पार्टी को सोशल मीडिया के जरिए इस्तीफा मिला। पाटिल ने उनसे बात की है और उन्हें भरोसा दिलाया है कि उनकी हर समस्या का समाधान किया जाएगा। वसावा गुजरात में पार्टी के वरिष्ठ नेता एवं सांसद हैं और हम उनकी सभी समस्याओं को सुलझाएंगे।

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