नई दिल्ली. किसान आंदोलन के चलते नम्बर पोर्ट होने से तिलमिलाई जियो को एयरटेल से मुंह की खानी पड़ी है।​ रिलायंस जियो दूरसंचार विभाग के समक्ष ये साबित नहीं कर पाई कि उसके टॉवरों को नुकसान पहुंचाने वाले किसानों के पीछे प्रतिद्वंद्वी कम्पनी एयरटेल का हाथ है। जियो ने दूरसंचार विभाग को पत्र लिखकर आरोप लगाया था कि उसकी प्रतिस्पर्धी कंपनियां प्रदर्शनकारियों को उसके टावरों को नुकसान पहुंचाने के लिए उकसा रही हैं।

एयरटेल ने जियो के पत्र के जवाब में दूरसंचार विभाग (डीओटी) से कहा है कि जियो इस बात का कोई सबूत नहीं दे पायी है कि उसके टावरों को पहुंचाए गए नुकसान में भारती एयरटेल की कोई भूमिका है। इसलिए जियो के आरोपों को खारिज किया जाना चाहिए। एयरटेल ने दूरसंचार सचिव अंशु प्रकाश को लिखे पत्र में कहा है कि जियो ने 28 दिसंबर को जो शिकायत की, उसके समर्थन में कोई सबूत पेश नहीं किया।

पत्र में कहा कि जियो दिसंबर में दूरसंचार नियामक ट्राई को पत्र लिखकर भी इसी तरह के आरोप लगा चुकी है। जियो का ये आरोप कि एयरटेल, जियो के मोबाइल कनेक्शन पोर्ट कराने के लिए किसान आंदोलन के पीछे खड़ी है, पूरी तरह बेबुनियाद है।

पत्र में कहा गया है कि कम्पनी इस बात से चकित है कि जियो ऐसा सोच रही है कि उसके नम्बरों को अपने साथ जोड़ने के लिए एयरटेल ये सब करा रही है। पत्र में कहा गया है कि अगर एयरटेल के पास यह शक्ति होती तो पिछले तीन वर्षों में जियो के पास पहुंचे उसके मोबाइल कनेक्शन को वह पहले ही रोक लेती।

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