गुजरात के एक विश्वविद्यालय का कारनामा

नई दिल्ली. हिंदुत्व की प्रयोगशाला कहे जाने वाले गुजरात ने एक नया कारनामा किया है। उसके एक विश्वविद्यालय ने आरटीआई लगाने वाली छात्रा से नागरिकता सबूत मांगा है। जबकि विश्वविद्यालय में प्रवेश के वक्त इस तरह के दस्तावेज जमा कराए ही जाते हैं जिनमें नागरिकता के सबूत होते हैं। इसके बिना विश्वविद्यालय में प्रवेश हो ही नहीं सकता।

गुजरात विश्वविद्यालय से मान्यता प्राप्त एक कॉलेज की छात्रा ने आरटीआई से इंटर्नल परीक्षा के मार्कशीट की प्रतियां मांगी थीं। संस्थान ने कहा कि पहले वे अपनी भारतीय नागरिकता साबित करें। छात्रा का कहना है कि संविधान या आरटीआई एक्ट में ऐसा कोई नियम नहीं है और वह इसे हाईकोर्ट में चुनौती देगी। विश्वविद्यालय से मान्यता प्राप्त गांधीनगर स्थित सिद्धार्थ लॉ कॉलेज की छात्रा तनाज़ नागोरी ने 19 अक्टूबर को आरटीआई लगाकर एलएलबी के छठे सेमेस्टर के इंटर्नल एग्जाम की मार्कशीट की प्रतियां मांगी थी।

जवाब में विश्वविद्यालय परीक्षा विभाग के जनसूचना अधिकारी (पीआईओ) ने कहा कि आरटीआई एक्ट, 2006 की धारा 6 के तहत भारतीय नागरिक ही जानकारी मांग सकता है। ये साबित करें कि वे भारतीय नागरिक हैं। नागरिकता का प्रमाण पत्र मिलने के बाद सूचना देने पर विचार किया जाएगा। इंडियन एक्सप्रेस अखबार के अनुसार गुजरात विश्वविद्यालय के वाइस-चांसलर हिमांशु पांड्या ने कहा कि यह मामला पीआईओ तक सीमित है। मैंने न तो आवेदन और न ही जवाब देखा है। इसलिए इस पर टिप्पणी नहीं कर सकता। लेकिन यह निश्चित है कि हम इस तरह के कदम नहीं उठाते हैं।

वहीं आवेदनकर्ता ने अखबार को बताया कि इंटर्नल एग्जाम में गड़बड़ियों की आशंका के चलते उन्होंने आरटीआई दायर कर जानकारी मांगी थी। कॉलेज में दायर आरटीआई का संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर उन्होंने गुजरात विश्वविद्यालय का रुख किया। नागोरी गोल्ड मेडलिस्ट हैं और उन्हें जनवरी में गुजरात विश्विद्यालय के 60वें दीक्षांत समारोह में पांच सेमेस्टर के दौरान बेहतरीन प्रदर्शन के लिए चार गोल्ड मेडल मिले थे। छात्रा का कहना है कि संविधान या आरटीआई एक्ट में कोई भी ऐसा नियम नहीं है, जिसके तहत आरटीआई आवेदन फाइल करने के लिए भारतीय नागरिकता साबित करनी पड़े।

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