बॉलीवुड समाज में व्याप्त कुरीतियों और करप्शन की बेहतरीन तस्वीर के साथ ही दिल की गहराइयों में उतर जाने वाली अपील अपनी फिल्मों के जरिए पिछले सात आठ दशक से कर रहा है. लेकिन वह इतने ही समय से पुलिस और फौज की वर्दी तथा उसके सम्मान के साथ खिलवाड भी कर रहा है. गुजरात कैडर के एक युवा आईपीएस अधिकारी ने बॉलीवुड की इस हरकत पर नाराजगी जताई है.

बॉलीवुड पर्दे पर रचे जाने वाले पुलिस के किरदारों को वह अपनी अज्ञानता में विदूषक जैसा चित्रित कर देता है. वह इतना अज्ञानी है कि नायक अथवा खलनायक को वर्दी पुलिस उपायुक्त की पहनाएगा और सम्बोधन ए इंस्पेक्टर के तौर पर कराएगा. सब इंस्पेक्टर की वर्दी वाले हीरो को एसीपी सम्बोधित करा देगा तो उसी एसीपी की वर्दी के कॉलर में टैब्स भी लगा देगा. यही हाल वर्दी पहनने वाले हीरो अथवा खलनायक की कैप का है.

केन्द्रीय कार्मिक, लोक शिकायत तथा पेंशन मंत्रालय के अधीन काम करने वाले कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग ने पुलिस वर्दी के निश्चित नियम बना रखे हैं. उन्हीं के मुताबिक पुलिस अधिकारियों की वर्दी में स्टार, क्रॉस तलवार, अशोक स्तम्भ, कॉलर टैब्स अथवा कॉलर पैच, बैज, बटन इत्यादि लगते हैं. इतना ही नहीं उनकी वर्दी की शर्ट की कॉलर की लम्बाई, उंचाई, माप भी फिक्स होती है. इसी तरह उनकी कैप भी निर्धारित होती है और उसे पहनने का तरीका भी ट्रेनिंग के दौरान बताया जाता है. वर्दी पहनने वाले अधिकारी की पैंट की माप, उसकी मोहरी, उसकी कमर में बंधने वाली बैल्ट की चौडाई के साथ ही उसे कहां पहनना है यानी नाभि के पास अथवा नीचे बैल्ट के साथ पहनना होता है. यहां तक कि वर्दीधारी बलों के अधिकारियों के हाथ में रहने वाले रूल यानी बेंत की साइज और रंग भी निर्धारित है.

लेकिन आप ये जानकर हैरान रह जाएंगे कि ऐतिहासिक किरदारों पर करोड़ों का रिसर्च, उनके कपड़ों पर भारी खर्च, लोकेशन और सेट पर भी बेहिसाब खर्च करने वाला बॉलीवुड पुलिस, केन्द्रीय फोर्स और मिलिट्री अधिकारियों की वर्दी, उनके रैंक, कैप इत्यादि पर खर्च करना पसंद नहीं करता. इसी वजह से वह वर्दी सिपाही की पहनाकर किसी को भी एसीपी बना देता है तो किसी को डीसीपी की कुर्सी पर बैठा देता है. भले ही एनटाइटल हो अथवा नहीं, किसी भी रैंक की वर्दी में कॉलर टैब्स लगा देता है. इससे पुलिस वर्दी का न सिर्फ अपमान होता है बल्कि ऐसी फिल्मों को देखने वालों की जनरल नॉलेज भी खराब हो जाती है.

बॉलीवुड की इस हरकत पर गुजरात कैडर के एक आईपीएस विजय सिंह गुर्जर ने ट्वीट करके दुख जताया है. ट्वीट में कहा गया है कि ये सिंघम, सिंबा, सूर्यवंशी ने मिलकर हमारी पुलिस की यूनिफार्म ख़राब करवा दी. जो पेंट शर्ट के 3-4 बट्टन छोड़कर पहनी जाती थी, अभी लगभग पैरों पर बांधी जाने लगी है. सही नियमानुसार सिलाई की हुई और स्वाभिमान से पहनी हुई वर्दी व्यक्तित्व को ही बेहतर बना देती है. इस आईपीएस का ट्विटर हैंडल @VijayGurjar_IPS है.

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