जयपुर. राजस्थान के सभी सरकारी और गैरसरकारी स्कूलों के भवन 18 जनवरी से फिर गुलजार हो जाएंगे। उनमें न सिर्फ प्रत्येक साठ मिनट के बाद घंटी की आवाज गूंजेगी बल्कि बच्चों की चिल्लपों भी सूने भवनों में चार चांद लगा देगी। लगभग 308 दिनों से घरों में बोर हो रहे वे स्कूली बच्चों इसे खुशखबरी मान रहे हैं जिन्हें घर से ज्यादा दोस्तों का साथ भाता है। स्कूल बंक करके मौज-मस्ती करने वाले सरकारी स्कूलों के विद्यार्थियों में भी स्कूल खुलने से उत्साह का माहौल है।

पिछले साल 15 मार्च को बंद हुए थे स्कूल

करीब दस महीने बाद स्कूलों में सफाई के साथ ही उसके प्रत्येक हिस्से को सेनेटाइज किया जा रहा है। कोरोना गाइड लाइन के तहत सरकार ने स्कूलों में 18 जनवरी से आधे बच्चों को बुलाने का आदेश दिया है। ज्ञात रहे कि पिछले वर्ष पूरे राजस्थान के सभी सरकारी और गैरसरकारी स्कूलों में 15 मार्च को छुट्टियां घोषित कर दी गईं थीं।

40 लाख बच्चों को मिलेगी ऑनलाइन पढ़ाई से मुक्ति

स्कूल खुलने के साथ ही प्रदेश के कक्षा 9 से 12 वीं क्लास के करीब 40 लाख बच्चों को ऑनलाइन पढ़ाई से मुक्ति मिल जाएगी। इनमें से 21 लाख विद्यार्थियों को 15 से परीक्षाएं भी देनी हैं। स्कूली बच्चों की मुश्किलों को कम करते हुए सरकार ने कोर्स का 40 फीसदी हिस्सा कम कर दिया है ताकि बच्चों को परीक्षाओं में कठिनाई का सामना नहीं करना पड़े।

सेनेटाइजेशन का नहीं मिला बजट

स्कूलों को फिर से शुरू करने से पहले सैनेटाइजेशन सहित अन्य प्रबंधों के लिए स्कूलों को अतिरिक्त बजट नहीं नहीं दिया गया है। उन्हें छात्र संख्या के आधार पर मिलने वाले 50 से 75 हजार रुपए तक के बजट से ही सैनेटाइजेशन व अन्य काम करने होंगे। इससे निजी स्कूलों के मुकाबले सरकारी स्कूल ज्यादा परेशान हैं। सेनेटाइजेशन समेत अन्य व्यवस्थाओं के लिए उनके पास बजट ही नहीं है। उन्हें अपने आपात बजट से ये इंतजाम करने पड़ रहे हैं।

दूसरी ओर स्कूल खुलने से निजी स्कूल संचालकों में खुशी की लहर है क्योंकि ऑनलाइन पढ़ाई के चलते उन्हें न सिर्फ फीस में कटौती करनी पड़ी है बल्कि अभिभावकों से उसकी वसूली में भी उन्हें दिक्कतों का सामना करना पड़ा है। स्कूल खुलने से वे अब आसानी से फीस और अन्य शुल्कों की वसूली कर सकेंगे।

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