जयपुर. प्रदेश में बलात्कार के 87 प्रतिशत मामले थाने में दर्ज कर लिए जाते हैं लेकिन 13 प्रतिशत मामलों में पीड़िताओं को अदालत की शरण लेनी पड़ती है और उसके बाद ही पुलिस बलात्कार के मामले दर्ज करती है।

पुलिस का दावा है कि वह बलात्कार के मामलों की जांच का समय 278 दिन से घटाकर 113 दिन तक ले आई है। बता दें कि तमाम तरह के मामलों में पुलिस को जांच के लिए औसत समय 90 दिन का मिलता है लेकिन पुलिस इस समयावधि में अधिकांश मामलों की जांच पूरी नहीं कर पाती जिससे अदालतों में आरोपपत्र दाखिल करने में देरी होती है जिसका नतीजा अन्तत: देरी से न्याय के रूप में सामने आता है।

सरकार के दो साल पर पुलिस मुख्यालय की ओर से जारी प्रेस नोट में कहा गया है कि प्रत्येक जिले में पुलिस उप अधीक्षक स्तर के अधिकारी नियुक्त कर महिला अपराध अनुसंधान इकाइयां बनाई गई हैं। जघन्य अपराधों की प्रभावी मॉनिटरिंग सीआईडी सीबी की हीनियस क्राइम मॉनिटरिंग यूनिट करती है।

पुलिस का दावा है कि आपरेशन क्लीन स्वीप के तहत गांजा, अफीम, चरस, स्मैक, डोडा पोस्त, कोकीन व एमडीएमए, ब्राउन शुगर एवं एलएसडी (लिसर्जिक एसीड डाईएथिलेमाइड) ड्रग्स, कोडैक्स फॉस्फेट सीरप की भारी मात्रा में बरामदगी भी की गई है। राजधानी जयपुर सहित प्रदेश भर में ड्रग्स माफिया के खिलाफ कठोर कार्रवाई की गई है। मादक द्रव्य बेचने वालों के खिलाफ कई एफआईआर दर्ज की गई हैं।

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