जयपुर. राजस्थान नगरीय क्षेत्र कृषि भूमि का अकृषि उपयोग के लिये अनुज्ञा एवं आवंटन नियम 2012 में संशोधन कर राज्य सरकार ने उन भूखंड मालिकों की जेब पर कैंची चला दी है, जिन्होंने भूखंड खरीदने के बाद नाम हस्तांतरण नहीं कराया है। सरकार अब नगरीय क्षेत्रों में पंजीकृत विक्रय पत्रों के आधार पर जमीन, भूखंड के नाम हस्तान्तरण पर कई गुना शुल्क वसूलेगी। ताजा संशोधन से पहले ये शुल्क 10 रूपए प्रति वर्ग मीटर था। अब इसे बढ़ाकर 100 वर्ग मीटर तक 10 रू. प्रति वर्ग मीटर, 100-300 वर्ग मीटर तक 15 रू., 300-500 वर्ग मीटर तक 20 रू, 500 से अधिक वर्ग मीटर का 25 रू. प्रति वर्ग मीटर कर दिया गया है।

नगरीय विकास आवासन एवं स्वायत्त शासन मंत्री शांति धारीवाल के अनुसार राज्य सरकार ने राजस्थान नगरीय क्षेत्र कृषि भूमि का अकृषि उपयोग के लिये अनुज्ञा एवं आवंटन नियम 2012 में जनहित में संशोधन करके धारा 90-ए की कार्यवाही के तहत 06 माह में राशि जमा कराने के प्रावधानों को एक वर्ष कर दिया गया है। एक वर्ष में राशि जमा नहीं होने पर 90-ए की कार्यवाही निरस्त हो जाएगी।

इसके अलावा लीज जमा कराने की प्रक्रिया का सरलीकरण किया गया है। अब व्यवसायिक में 05 प्रतिशत लीज एवं अन्य सभी में 2.5 प्रतिशत लीज देय होगी। अब तक लीज होल्ड पर दिए जा रहे कृषि भूमि के पट्टे की अपेक्षा फ्री होल्ड पट्टे दिए जाएंगे। कृषि भूमि के पट्टों में निर्माण अवधि 7 वर्ष से घटा कर 5 वर्ष कर दी गई है। पांच से दस वर्ष में निर्माण नहीं किया तो आवासीय दर की 01 प्रतिशत राशि जमा करवाकर निर्माण अवधि विस्तार भी कराया जा सकेगा। यदि इसके पश्चात् भी भूखण्ड पर निर्माण नहीं किया तो नोटिस देकर आवंटन/नियमन निरस्त कर दिया जाएगा। स्वतंत्र भूखण्डों में एक इकाई निर्माण (एक कमरा, रसोई, लेट-बाथ) करना आवश्यक होगा। बड़े भूखण्डों में आच्छादित क्षेत्र में भूखण्डों के 1/5वें भाग तक न्यूनतम निर्माण जरूरी होगा।

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