बेबाक बात

सुभाष राज

राजस्थान में अशोक गहलोत सरकार के खिलाफ नाकाम बगावत और जनाक्रोश यात्राओं के फीके प्रदर्शन से नाराज भाजपा की केन्द्रीय जोड़ी विधानसभा चुनाव की कमान एक अनाम नेता को सौंप कर पूरी भाजपा को चौंका सकती हैं. इस नेता का नाम इन दिनों सत्ता के गलियारों में बहुत तेजी से गूंज रहा है. ये नेता प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का उसी तरह चहेता है, जिस तरह हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहरलाल खट्टर हैं. वह गृहमंत्री अमित शाह का भी करीबी है और बॉस के आदेश की पालना में यकीन रखता है.

मोदी और शाह की जोड़ी के क्रियाकलापों पर करीब से नजर रखने वालों का मानना है कि ये नेता राजस्थान के जातिगत समीकरणों के लिहाज से भी भाजपा की राजनीति में आसानी से फिट हो सकता है और केन्द्रीय मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत की तरह राजनीतिक पिच पर अनाडियों की तरह भी नहीं खेलेगा. इस नेता का नाम है केन्द्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव. राजस्थान के पाली जिले में जन्मे अश्विनी वैष्णव उडीसा में बसे हुए हैं और गुजरात कैडर के आईएएस रहे हैं. गुजरात के मुख्यमंत्री रहते समय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की गुडबुक में आए अश्विनी वैष्णव जाति से ब्राह्मण हैं. अंग्रेजीदां होने के बावजूद हिंदी बोलने में पारंगत हैं और आत्मप्रचार से ज्यादा काम में यकीन रखते हैं.

पूर्व आईएएस रहे इस नेता का राजस्थान में कोई जनाधार नहीं है और उनका मूल परिवार राज्य से कई दशक पहले पलायन कर चुका है, इसलिए उसे भाई—भतीजावाद का सामना भी नहीं करना पड़ेगा. आप सबको याद होगा कि प्रधानमंत्री बनने के बाद से ही राजस्थान की दो बार मुख्यमंत्री रह चुकी वसुंधरा राजे से नरेन्द्र मोदी का छत्तीस का आंकडा है और उनके लेफ्टिनेंट केन्द्रीय गृहमंत्री अमित शाह भी उन्हें पसंद नहीं करते. राजस्थान के कोने—कोने में जाना—पहचाना नाम बन चुकी वसुंधरा राजे को 2013 से 2018 के कार्यकाल में एक से अधिक बार मुख्यमंत्री की कुर्सी से उतारने की नाकाम कोशिश के बाद मोदी और शाह की जोड़ी ने केन्द्रीय मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत पर दांव लगाकर 2020 में कांग्रेस से सत्ता छीनने की स्क्रिप्ट लिखी थी.

जानकारों का कहना है कि इस कहानी का नायक केन्द्रीय गजेन्द्र सिंह शेखावत को बनाया गया था लेकिन राजनीति के मंजे हुए खिलाड़ी अशोक गहलोत ने पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे की सहायता से सरकार गिराने की साजिश न सिर्फ नाकाम कर दी बल्कि टेपिंग के जरिए गजेन्द्र सिंह शेखावत को भी अपने जाल में फांस लिया.

भाजपा के गलियारों में ये चर्चा आम है कि ना खुदा ही मिला ना बिसाले सनम वाले 2020 के आपरेशन कमल की भद पिटने के बाद मोदी शाह की जोड़ी के समक्ष राजस्थान के सात नेता लगातार गर्दन उचकाकर विधानसभा चुनावों में नेतृत्व का जयमाल पहनने की कोशिश कर रहे हैं लेकिन हाल ही पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष की जनाक्रोश यात्रा उद्घाटन सभा में भीड़ जुटाने में नाकामी के साथ ही प्रदेश की सभी 200 विधानसभा सीटों पर इस यात्रा की दुर्गति ने स्पष्ट कर दिया कि फिलवक्त वसुंधरा राजे का राजस्थान भाजपा में कोई विकल्प नहीं है.

दिल्ली में सत्ता के गलियारों में विचरने वाले एक भाजपाई का दावा है कि मोदी और शाह की जोड़ी वसुंधरा राजे को फूटी आंख भी नहीं देखना चाहती. लेकिन वह राजस्थान और मध्यप्रदेश की सत्ता को गंवाना भी नहीं चाहती. इसलिए वह राजस्थान की गुटबाजी से दूर केन्द्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव को ताजा चेहरे के रूप में उसी तरह लॉन्च करना चाहती है, जिस तरह करीब दो दशक पहले पूर्व मुख्यमंत्री भैरोंसिंह शेखावत ने वसुंधरा राजे को राजस्थान के राजनीतिक रण में उतारकर पार्टी के गुटबाज नेताओं को करारी शिकस्त दी थी.

चर्चा है कि राजस्थान के जातिगत समीकरणों के लिहाज से भी ब्राह्मण होने के नाते वैष्णव करीब आठ से दस प्रतिशत वोटरों के मन को भा सकते हैं. लो प्रोफाइल रहने में भरोसा करने वाले वैष्णव विरोधियों से पटरी बैठाने में भी पारंगत बताए जा रहे हैं. औसत से बेहतर भाषण कला और मीठी बोली को भी उनकी अतिरक्त योग्यता के रूप में प्रचारित किया जा रहा है.

माना जा रहा है कि मलमास समाप्त होने के बाद होने वाले भाजपा राष्ट्रीय अधिवेशन में उनकी लॉन्चिंग स्क्रिप्ट पर मुहर लग सकती है.

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