लगता है कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा के हिंदी हार्ट लैंड में भारी स्वागत से भाजपा को अपच हो गई है. भारत के पूर्व ​वित्त सचिव अरविंद मायाराम पर सीबीआई के छापों को इसी का नतीजा माना जा रहा है. राजनीतिक विश्लेषक हैरानी के साथ इन छापों को देख रहे हैं. वे मान रहे हैं कि केन्द्रीय सत्ता पर काबिज भाजपा अपने सबसे बड़े दुश्मन कांग्रेस को संजीवनी देने की कोशिश करने वालों को कतई नहीं बख्शेगी चाहे इसके लिए उसे कुछ भी करना पड़े.

माना जा रहा है कि सत्ता पर कब्जे की डॉग फाइट अब उस दौर में प्रवेश कर गई है, जब प्रतिद्वं​द्वी पार्टियों के लीडरों के साथ ही उनके समर्थक अफसरों को सत्ता खोने के बाद जेलों का मुंह देखना पड़ सकता है. अरविंद मायाराम कभी राजस्थान की राजनीति में बहुत ताकतवर कांग्रेस नेता रही इंदिरा मायाराम के बेटे हैं. वे राजस्थान सरकार में कई बार मंत्री रह चुकी हैं.

अरविंद मायाराम पर आरोप है कि उन्होंने एक ब्रिटिश कंपनी डे ला रूए को पेटेंट के बिना नोटों के सुरक्षा धागे के टेंडर को एक्सटेंशन देने के मामले में तत्कालीन वित्त मंत्री को अंधेरे में रखा था. अरविंद मायाराम राजीव गांधी ट्रस्ट के लिए भूमि आवंटन मामले में हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेन्द्र हुड्डा के साथ सहअभियुक्त भी हैं.

वैसे तो ये जांच के बाद ही पता चलेगा कि अरविंद मायाराम ने इस डील में क्या पाया और क्या खोया लेकिन सबसे मजेदार बात ये है कि इन्हीं अरविंद मायाराम को अपने पहले कार्यकाल में मोदी सरकार ने कई अफसरों पर वरीयता देते हुए वित्त सचिव बनाया था और उस दौरान पीएमओ उन पर बहुत अधिक भरोसा करता था. यहां तक कि प्रधानमंत्री के बहुत करीबी और नीति आयोग के तत्कालीन उपाध्यक्ष अरविंद पानगडिया भी मायाराम की प्रोफाइल से रश्क करते थे और उनके इस्तीफे के पीछे वित्त मंत्रालय में मायाराम के अनेक निर्णयों का हाथ रहा है.

अरविंद मायाराम के ठिकानों पर पड़े सीबीआई छापों के लिए जिस एफआईआर को आधार बनाया गया है, वह 11 जनवरी को ही दर्ज की गई है. इससे ठीक पहले मायाराम ने राहुल गांधी के साथ भारत जोड़ो यात्रा में हाथ से हाथ मिलाकर गांधी परिवार के साथ अपने मजबूत रिश्तों की घोषणा की थी. अब सवाल है कि केन्द्र सरकार ने सिर्फ अरविंद मायाराम पर ही हाथ क्यों डाला, ज​बकि राहुल गांधी के साथ ऐसी बांडिंग तो रिजर्व बैंक के पूर्व गर्वनर रघुराम राजन, पूर्व थल सेनाध्यक्ष दीपक कपूर समेत अनेक हस्तियां दिखा चुकी हैं.

असल में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के भाषण कौशल के सामने निस्तेज हो चुकी कांग्रेस की भारत जोड़ो यात्रा सोशल मीडिया की सहायता से उन मुद्दों को केन्द्र में ले आई है, जिन्हें पिछले आठ साल से भाजपा ने पर्दे के पीछे धकेल रखा है. जब भी कांग्रेस ने केन्द्र सरकार की विफलताओं की तोहमत प्रधानमंत्री के सिर मढ़ी, भाजपा ने नया नरेटिव सेट करके उसके सभी अभियानों की हवा निकाल दी. फिर भले ही राहुल गांधी के लोकसभा में प्रधानमंत्री पर तीखे हमलों के बाद उनके गले लगने का मामला हो अथवा कोरोना काल में मजदूरों के पैदल चलने का मामला या फिर चीनी सीमा पर घुसपैठ के आरोप, सरकार हर बार बड़ी सफाई से चर्चा का केन्द्र बदलकर कांग्रेस को राजनीतिक हाशिए पर धकेलने में सफल रही. इसके अलावा उसने क्षेत्रीय दलों की बांह मरोडकर भी कांग्रेस पर दवाब बनाए रखा.

ये पहली बार है, जब कांग्रेस का भारत जोड़ो यात्रा शो कन्याकुमारी से चलते ही लोगों के आकर्षण का केन्द्र बन गया और उसमें लोग उमड़ने लगे. दक्षिणी राज्यों, यहां तक कि मध्यप्रदेश और राजस्थान तक भी भारी भीड़ उमड़ने पर भाजपा ये मानकर स्वयं को दिलासा देती रही कि ये भीड़ तमाशबीनों की है और उसका वोट बैंक सुरक्षित है. लेकिन दिल्ली की सड़कों पर आया जनता का सैलाब जब उत्तर प्रदेश, हरियाणा, पंजाब तक बरकरार रहा. तो पार्टी ने अपनी रणनीति बदली और पहली बार भाजपा के चाणक्य माने जाने वाले केन्द्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने एक जनवरी 2024 को राम मंदिर को दर्शनों के लिए खोल दिए जाने का बयान देकर संकेत दिए कि पार्टी अब राहुल की भारत जोड़ो यात्रा को गम्भीरता से ले रही है और इसके माध्यम से वह अपने मध्यम वर्गीय समर्थक वर्ग में कांग्रेस को सेंध नहीं लगाने देगी.

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के मुखपत्र हिंदी के पांचजन्य और अंग्रेजी के आर्गेनाइजर में संघ के सरसंघ चालक डा. मोहनराव भागवत के विस्तृत इंटरव्यू को भी भारत जोडो यात्रा से उपजी घबराहट का ही नतीजा माना जा रहा है. विस्तार से छापे गए साक्षात्कार में मोहन भागवत ने एक हजार साल से लड़ाई के दौर से गुजर रहे हिंदू समाज का हवाला देते हुए मुसलमानों को नर्म शब्दों में चेताया है कि उन्हें ये अहसास त्यागना ही होगा कि वे कभी शासक रहे हैं.

ये कहकर उन्होंने भारत के मध्यम वर्ग में सुप्त हो रहे नफरती भाव को फिर से जगाने की चेष्टा की है ताकि वे कांग्रेस के उस फिक्स बीस फीसदी वोटर के साथ फलोट नहीं हो जाएं जिसे भाजपा दो बार धोबी पछाड हार देकर भी कांग्रेस से छीन नहीं पाई है. इसलिए वह गुजरात के टाइम टैस्टेड फार्मूले की लीक पर लौट आई है.

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