नई दिल्ली. किसान आंदोलन का खुलकर समर्थन कर रही कांग्रेस ने सुप्रीम कोर्ट की ओर से बनाई गई चार सदस्यीय विशेषज्ञ समिति के गठन पर सवाल खड़े किए हैं। पार्टी ने सवाल किया है कि जो लोग इन काले क़ानूनों को सही ठहरा चुके हैं, वे किसानों के साथ न्याय कैसे करेंगे?

पार्टी प्रवक्ता रणदीप सिंह सुरजेवाला ने बुधवार को पत्रकारों से कहा कि कमेटी के चारों सदस्य पहले से ही मोदी के साथ खड़े हैं। वे काले क़ानूनों के साथ खड़े हैं। एक सदस्य कह चुके हैं कि इन क़ानूनों से ही किसानों को आज़ादी मिलेगी। एक अन्य तो सरकार को ज्ञापन दे चुके हैं कि वे इन क़ानूनों के समर्थन में सरकार के साथ खड़े हैं। खेत और खलिहान को कारपोरेट के हवाले करने की मोदी की साज़िश के साथ खड़े हैं। सुरजेवाला ने सवाल किया कि आखिर ये सब होते हुए ये कमेटी किसानों के साथ न्याय कैसे करेगी? या कैसे कर सकती है? उनका सवाल है कि इसका नतीजा क्या निकलेगा?
कांग्रेस का कहना है कि किसानों और केंद्र सरकार के बीच जारी विवाद को सुलझाने के लिए जो कमेटी बनाई गई है, उसमें शामिल सदस्य पहले ही सार्वजनिक तौर पर यह निर्णय दे चुके हैं कि ये तीनों काले क़ानून सही हैं।

रणदीप सिंह सुरजेवाला ने बताया कि कमेटी सदस्य अशोक गुलाटी बाक़ायदा ये लेख लिख चुके हैं कि ये तीन क़ानून बिल्कुल सही हैं। उनकी राय है कि विपक्षी दल भटक गये हैं व किसान भी शायद भटक गये हैं। उन्होंने ये भी कहा कि मैं पहले से ही कह रहा हूँ कि इन क़ानूनों के फ़ायदे किसानों के समझ नहीं आ रहे! यद्यपि कांग्रेस पार्टी का मानना है कि सुप्रीम कोर्ट ने किसानों के मामले में चिंता ज़ाहिर कर केंद्र सरकार को आईना दिखाया है।

उल्लेखनीय है कि सुप्रीम कोर्ट की बनाई हुई चार सदस्यीय कमेटी के समक्ष पेश होने से आंदोलनकारी किसान इनकार कर चुके हैं। जबकि सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि किसानों को समिति के समक्ष पेश होना ही होगा। माना जा रहा है कि सुप्रीम कोर्ट के पेश होने पर जोर देने और किसानों के इनकार से यह आशंका गहरा रही है कि कहीं इसी को लेकर सरकार और किसानों के बीच टकराव इतना नहीं बढ़ जाए कि बल प्रयोग की नौबत आ जाए।

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